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आम पोषक तत्व ‘जिएक्सैंथिन’ से कैंसर इलाज को मिल सकती है नई ताकत : अध्ययन

वॉशिंगटन डीसी। University of Chicago के वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन में खुलासा किया है कि जिएक्सैंथिन (Zeaxanthin) नामक सामान्य पोषक तत्व कैंसर के इलाज (cancer treatment) को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है। Cell…

24GhanteOnline
April 13, 2026
2 min read

वॉशिंगटन डीसी। University of Chicago के वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन में खुलासा किया है कि जिएक्सैंथिन (Zeaxanthin) नामक सामान्य पोषक तत्व कैंसर के इलाज (cancer treatment) को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है। Cell Reports Medicine जर्नल में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, यह तत्व प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत कर कैंसर कोशिकाओं से लड़ने की क्षमता बढ़ा सकता है।

अध्ययन के वरिष्ठ लेखक वैज्ञानिक जिंग चेन ने बताया कि जिएक्सैंथिन, जिसे अब तक आंखों की सेहत के लिए जाना जाता था, अब कैंसर के खिलाफ इम्यून सिस्टम को सक्रिय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता पाया गया है। उन्होंने कहा कि यह साधारण पोषक तत्व उन्नत कैंसर उपचार, खासकर इम्यूनोथेरेपी के प्रभाव को बढ़ा सकता है।

टी-सेल्स को बनाता है ज्यादा प्रभावी

शोध में पाया गया कि जिएक्सैंथिन CD8+ T-सेल्स (प्रतिरक्षा कोशिकाएं) की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। ये कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट करने में अहम भूमिका निभाती हैं। जिएक्सैंथिन टी-सेल रिसेप्टर (TCR) को स्थिर करने में मदद करता है, जिससे कोशिकाओं की सक्रियता और ट्यूमर को खत्म करने की क्षमता बढ़ती है।

इम्यूनोथेरेपी के साथ बेहतर परिणाम

चूहों पर किए गए प्रयोगों में पाया गया कि आहार में जिएक्सैंथिन शामिल करने से ट्यूमर की वृद्धि धीमी हुई। जब इसे इम्यूनोथेरेपी के साथ दिया गया, तो इसका असर और अधिक मजबूत देखा गया। लैब परीक्षणों में यह भी सामने आया कि यह तत्व मेलानोमा, मल्टीपल मायलोमा और ग्लियोब्लास्टोमा जैसी कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में सहायक हो सकता है।

आसानी से उपलब्ध और सुरक्षित

जिएक्सैंथिन एक प्राकृतिक पोषक तत्व है, जो पालक, केल और संतरी शिमला मिर्च जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। यह पहले से ही एक ओवर-द-काउंटर सप्लीमेंट के रूप में उपयोग किया जाता है और सुरक्षित माना जाता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसे कैंसर उपचार के पूरक के रूप में आसानी से अपनाया जा सकता है।

आगे की राह

हालांकि शोध के नतीजे उत्साहजनक हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अभी शुरुआती चरण में है। इसके प्रभाव को पूरी तरह समझने के लिए मानवों पर क्लिनिकल ट्रायल की आवश्यकता होगी।

शोधकर्ताओं ने कहा कि यह अध्ययन “न्यूट्रिशनल इम्यूनोलॉजी” के एक नए क्षेत्र की शुरुआत करता है, जिसमें यह समझा जाएगा कि आहार के तत्व किस तरह प्रतिरक्षा तंत्र को प्रभावित करते हैं और आधुनिक उपचारों को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

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