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योगी सरकार का गोरखपुर का ‘मातृ सेवा’ मॉडल बना जीवनरक्षक

लखनऊ: योगी सरकार (Yogi Government) का मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए ट्रायल के तौर पर गोरखपुर में चलाया जा रहा पायलट प्रोजेक्ट पूरे प्रदेश के लिए नजीर बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पायलट…

24GhanteOnline
August 6, 2026
4 min read
योगी सरकार का गोरखपुर का ‘मातृ सेवा’ मॉडल बना जीवनरक्षक

लखनऊ: योगी सरकार (Yogi Government) का मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए ट्रायल के तौर पर गोरखपुर में चलाया जा रहा पायलट प्रोजेक्ट पूरे प्रदेश के लिए नजीर बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पायलट प्रोजेक्ट ‘मातृ सेवा’ का लक्ष्य हाई रिस्क गर्भवती केसों को तुरंत बड़े अस्पतालों में रेफर कर बचाना है। गोरखपुर में बीते दो महीने में पहल के तहत 15 अतिगंभीर पोस्टपार्टम हैमरेज (प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव) के मामलों को बचाया गया है। अब आसपास के जिलों के हाईरिस्क मरीजों को भी गोरखपुर में एडमिट किया जा रहा है।

विभिन्न अस्पतालों के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षकों का व्हाट्सअप ग्रुप बनाया गया

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि उत्तर प्रदेश टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (यूपीटीएसयू) व स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई इस पहल में उच्च जोखिम गर्भावस्था प्रबंधन के लिए एम्स, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला महिला अस्पताल के डॉक्टरों, सामुदायिक/प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) व अस्पतालों के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षकों का व्हाट्सअप ग्रुप बनाया गया है। इस ग्रुप में आशा, एएनएम, नर्स, एम्बुलेंस कोआर्डिनेटर व सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) भी शामिल हैं। जैसे ही कोई आशा या परिजन गर्भवती को ग्रामीण अस्पताल लेकर पहुंचते हैं तो विभागीय टीम हाईरिस्क वाले केसों की पहचान करती है और जरूरत के हिसाब से उन्हें उच्च अस्पताल भेजती है। प्रसव के समय अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर डिलिवरी कराते हैं और जोखिम बढ़ने पर फौरन उच्च अधिकारियों को सूचित करते हैं। केस की गंभीरता व रेफर करने की सारी सूचनाएं इस व्हाट्सअप ग्रुप पर पोस्ट किया जाता है व फोन करके भी टीम को अलर्ट कर दिया जाता है। यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि एम्बुलेंस तुरंत प्रसूता को लेने स्थानीय अस्पताल पहुंचे।

टीम के अलर्ट मोड से 15 अतिगंभीर मामलों के मरीजों को बचाया गया

सीएमओ डॉ. राजेश झा ने बताया कि प्रदेश में पहली बार किसी जिले में उच्च जोखिम गर्भावस्था में जान बचाने का अनोखा अभियान चल रहा है। 21 मई से शुरू अभियान में अब तक दो महीने में 363 उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों का इलाज किया गया है। इनमें से 55 तो पोस्टपार्टम हैमरेज के केस थे। इन 55 में से 15 तो अतिगंभीर मामले थे जिन्हें टीम के अलर्ट मोड में होने के कारण बचाया जा सका। पोस्टपार्टम हैमरेज मातृ मृत्यु की सबसे बड़ी वजह है। इसके अलावा 43 अतिगंभीर एनिमिया व 19 एक्लम्पसिया (गर्भावस्था के दौरान अचानक दौरे पड़ना या बेहोश हो जाना) के मामले भी बचाए जा सके। उन्होंने बताया कि अब आसपास के जिलों के हाईरिस्क मरीजों को भी गोरखपुर में एडमिट किया जा रहा है। सीएमओ ने बताया कि दो महीने की ट्रायल रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाएगी। अगर यह प्रदेश के अन्य जिलों में लागू होती है तो यह मातृ मृत्यु दर को कम करने का कारगर हथियार साबित हो सकता है।

तुरंत रेस्पांस ने रोका मौत का रास्ता, बची महिला की जान

देवरिया का केस इस बात की नजीर है कि हाईरिस्क प्रेगनेंसी मैनेजमेंट सिस्टम के फौरन एक्शन में आने से कैसे एक जान बच गई। महर्षि देवरहा चिकित्सा महाविद्यालय देवरिया की आन ड्यूटी चिकित्सा अधिकारी डॉ. नूपुर श्रीवास्तव ने बताया कि देवरिया की रिंकी देवी (34) ने बीते सोमवार को पथरदेवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद गंभीर हुई इस महिला को रात लगभग 11:05 बजे देवरिया मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। उसे बहुत ज़्यादा रक्तस्राव हो रहा था। भर्ती होने के समय वह 'हेमोरेजिक शॉक' (खून की कमी से होने वाला शॉक) की हालत में थी। उसके ज़रूरी शारीरिक संकेत तेज़ी से बिगड़ रहे थे।

शुरुआती इलाज के बाद पौने एक बजे देवरिया की टीम ने गोरखपुर रेफरल ट्रैकिंग टीम को बताया कि मरीज़ को बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। गोरखपुर टीम ने तुरंत बीआरडी इमरजेंसी टीम से तालमेल किया। मरीज़ अल सुबह 2 बजे शॉक की हालत में बीआरडी पहुंची। इमरजेंसी ऑब्सटेट्रिक टीम ने तुरंत एडवांस्ड रिसेसिटेशन (जीवन बचाने की प्रक्रिया) शुरू की और एक यूनिट ब्लड चढ़ाया। टीमों के बीच बेहतरीन क्लीनिकल प्रबंधन और तालमेल की वजह से मरीज की हालत में काफी सुधार हुआ और अब खतरे से बाहर है।

Tags:cm yogi

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