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कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

सनातन धर्म में ज्येष्ठ माह की बड़ा महत्व बताया गया है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) रखा जाता है। ये व्रत महिलााएं अपनी पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। वैवाहिक जीवन में सुख बना रहे…

24GhanteOnline
April 24, 2026
2 min read

सनातन धर्म में ज्येष्ठ माह की बड़ा महत्व बताया गया है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) रखा जाता है। ये व्रत महिलााएं अपनी पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। वैवाहिक जीवन में सुख बना रहे इसके लिए भी इस व्रत को रखा जाता है। इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा करने का विधान है।

इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए बरगद के पेड़ की विधि-विधान से पूजा करती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल वट सावित्री का व्रत कब रखा जाएगा? साथ ही जानते हैं कि वट सावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) कब है?


वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि इस साल 16 मई 2026 को सुबह 05 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी।
17 मई 2026 को रात 01 बजकर 30 मिनट इस तिथि का समापन हो जाएगा।
इस तरह उदया तिथि के अनुसार, 16 मई 2026 को वट सावित्री व्रत रखा जाएगा।

वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) 2026 शुभ मुहूर्त


वट सावित्री व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 07 मिनट से लेकर 04 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 04 मिनट से लेकर 03 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 07 बजकर 04 मिनट से लेकर 07 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। निशिता मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।

वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) पूजा विधि


वट सावित्री व्रत के दिन सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें। मन ही मन व्रत का संकल्प करें। बांस की दो टोकरी में सप्तधान्य भरें। ब्रह्मा और सावित्री की प्रतिमा एक टोकरी पर रखें। दूसरी टोकरी में सत्यवान और सावित्री की प्रतिमा रखें। देवी सावित्री के पूजन में शृंगार सामग्री चढ़ाएं। फिर देवी सावित्री के मंत्रों का जाप करते हुए अर्घ्य दें। इसके बाद वटवृक्ष की पूजा करें।

पूजा संपन्न होने पर पेड़ की जड़ों में जल चढ़ाएं। बरगद के पेड़ की परिक्रमा करें और साथ में उसके तने पर कच्चा सूता भी लपेटती जाएं। 108, 28 या फिर कम से कम सात बार परिक्रमा करें। फिर पेड़ के नीचे बैठकर वट सावित्री व्रत कथा सुने सुनाएं। पति की लंबी उम्र और सुख-शांति के लिए देवी सावित्री और बगरद के पेड़ से प्रार्थना करें।

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