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कब है रंग पंचमी, जानें पूजा विधि एवं महत्व

रंग पंचमी (Rang Panchami) का त्योहार हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के दिन ये पावन पर्व मनाया जाता है। रंग पंचमी को देव पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि, इस शुभ तिथि पर देवी-देवता…

24GhanteOnline
March 6, 2026
2 min read
कब है रंग पंचमी, जानें पूजा विधि एवं महत्व

रंग पंचमी (Rang Panchami) का त्योहार हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के दिन ये पावन पर्व मनाया जाता है। रंग पंचमी को देव पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि, इस शुभ तिथि पर देवी-देवता स्वर्ग से धरती पर आते हैं और रंगों के साथ होली खेलते हैं। ये देवताओं की अनोखी होली मानी जाती है।

यही कारण है कि रंग पंचमी के दिन पूजा-पाठ आदि का बहुत महत्व सनातन धर्म शास्त्रों में वर्णित है। रंग पंचमी पर श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा का अत्यंत शुभ फल मिलता है। रंग पंचमी का दिन विशेष रूप से श्री कृष्ण और राधा रानी को समर्पित किया गया है। मान्यता है कि, इस दिन उन्हें गुलाल अर्पित कर होली खेलने से दांपत्य सुख बढ़ता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल 07 या 08 मार्च रंग पंचमी किस दिन मनाई जाएगी? साथ ही जानते हैं इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

रंग पंचमी (Rang Panchami) 2026 कब है?


द्रिक पंचांग के मुताबिक, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 07 मार्च को शाम 07 बजकर 17 मिनट पर हो रही है। इस तिथि का समापन 08 मार्च को रात 09 बजकर 10 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, इस साल रंग पंचमी का पर्व 08 मार्च को मनाया जाएगा।

रंग पंचमी (Rang Panchami) 2026 शुभ मुहूर्त


रंग पंचमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 01 मिनट से 05 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 08 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 23 मिनट से लेकर 06 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।

रंग पंचमी (Rang Panchami) पूजा विधि


रंग पंचमी के दिन स्नान करके साफ कपड़े पहनें। फिर एक साफ चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। इसके बाद उस पर श्रीकृष्ण और राधा जी की मूर्ति या चित्र रखें। फिर उन्हें पुष्पमाला पहनाएं और नए वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद गुलाल, अबीर और सुगंधित पुष्प अर्पित करें। कुछ मौसमी फल भी पूजा में शामिल करें। माखन, मिश्री, फल और मिठाई का भोग लगाएं। दीपक और धूप जलाकर आरती करें। अंत में प्रसाद बांटें।

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