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अगस्त में कब है मासिक शिवरात्रि, जानें पूजा का महत्व

प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि (Shivratri) मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है और भक्त इस दिन उनकी पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। अगर आप भी अगस्त 2025 में आने…

24GhanteOnline
August 7, 2025
2 min read

प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि (Shivratri) मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है और भक्त इस दिन उनकी पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। अगर आप भी अगस्त 2025 में आने वाली मासिक शिवरात्रि के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। यहां हम आपको इसकी तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा के महत्व के बारे में विस्तार से बताएंगे।

कब है अगस्त 2025 की मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri) ?


पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 21 अगस्त 2025 को दोपहर 12 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, यह तिथि अगले दिन यानी 22 अगस्त को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर इसका समापन होगा। मासिक शिवरात्रि की पूजा निशाकाल (रात के समय) में की जाती है, इसलिए इस बार मासिक शिवरात्रि 21 अगस्त 2025, गुरुवार को मनाई जाएगी।

मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri) की पूजा का शुभ मुहूर्त


मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri) पर भगवान शिव की पूजा के लिए निशाकाल का समय सबसे शुभ माना जाता है। 21 अगस्त की रात, पूजा का शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भक्त भगवान शिव की विशेष पूजा और अभिषेक कर सकते हैं।

मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri) की पूजा का महत्व


मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri) का व्रत बहुत ही फलदायी माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की सच्चे मन से पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं: जिन लोगों के विवाह में रुकावटें आ रही हैं, उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए। माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।

मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri) का व्रत रखने से जीवन में सुख-शांति आती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने वाले भक्तों को भगवान शिव उनकी इच्छा के अनुसार फल देते हैं। मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति को अपने सभी पापों से मुक्ति मिलती है और वह मोक्ष की ओर अग्रसर होता है।

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