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उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल बना देश के लिए मिसाल

देहरादून। उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल (Disaster Management Model) अब राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रभावी कार्यशैली के लिए पहचान बना रहा है। मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के क्रम में राष्ट्रीय…

24GhanteOnline
July 27, 2026
3 min read
उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल बना देश के लिए मिसाल

देहरादून। उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल (Disaster Management Model) अब राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रभावी कार्यशैली के लिए पहचान बना रहा है। मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के क्रम में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की संयुक्त टीम ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का दौरा कर राज्य की आपदा तैयारियों, संसाधनों और भविष्य की रणनीतियों की विस्तृत समीक्षा की।

बैठक के दौरान एनडीएमए के संयुक्त सलाहकार कर्नल संजीव कुमार शाही ने उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल की सराहना करते हुए इसे देश के अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि राज्य ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी प्रणाली, संस्थागत समन्वय और तकनीक आधारित आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया जा सकता है।

कर्नल शाही ने यूएसडीएमए की विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए हाइड्रोमेट नेटवर्क के विस्तार को समयबद्ध और सटीक पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने आधुनिक तकनीक और रियल-टाइम डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने पर बल दिया।

बैठक में हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर भी गंभीर चर्चा हुई। कर्नल शाही ने कहा कि ग्लेशियर झीलों से उत्पन्न होने वाली बाढ़ (ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड) भविष्य की बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐसे में ग्लेशियर झीलों की लगातार निगरानी, समय पर पूर्व चेतावनी और प्रभावी निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने इस दिशा में एनडीएमए की ओर से हरसंभव तकनीकी और संस्थागत सहयोग का भरोसा दिलाया।

बैठक में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की वर्तमान क्षमता और संसाधनों की भी समीक्षा की गई। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और आपदा संवेदनशीलता को देखते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप दोनों बलों की संख्या और क्षमता बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया गया, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किए जा सकें।

समीक्षा बैठक में हीट वेव एक्शन प्लान, लैंडस्लाइड एवं फ्लैश फ्लड एक्शन प्लान, फॉरेस्ट फायर एक्शन प्लान, आकाशीय बिजली से बचाव, राज्य एवं जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों के आधुनिकीकरण, अग्निशमन सेवाओं को सशक्त बनाने, उन्नत संचार प्रणाली, पूर्व चेतावनी तंत्र और बहु-एजेंसी समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से आपदा जोखिम न्यूनीकरण, क्षमता विकास, सामुदायिक सहभागिता, हाइड्रोमेट नेटवर्क विस्तार, तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली तथा राहत एवं बचाव व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए किए जा रहे कार्यों और नवाचारों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

बैठक में एनडीआरएफ के नोडल अधिकारी लल्लन कुमार, एसीईओ (प्रशासन) प्रकाश चंद्र, एसीईओ (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी, अपर सचिव गृह तृप्ती भट्ट, एसडीआरएफ के कमांडेंट अर्पण यदुवंशी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा, अग्निशमन विभाग के उपनिदेशक एस.के. राणा, एनडीआरएफ के अजय पंत, यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार, डिप्टी एसपी एस.एस. नेगी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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