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करवा चौथ की थाली में दिखेगा भारत का स्वाद, जानें अलग-अलग राज्यों की खास डिशेज

करवा चौथ का त्योहार भारत के कई राज्यों में पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और पूजा-पाठ से लेकर श्रृंगार तक की तैयारियां करती हैं। त्योहारों की रौनक पारंपरिक…

24GhanteOnline
October 29, 2026
4 min read
करवा चौथ की थाली में दिखेगा भारत का स्वाद, जानें अलग-अलग राज्यों की खास डिशेज

करवा चौथ का त्योहार भारत के कई राज्यों में पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और पूजा-पाठ से लेकर श्रृंगार तक की तैयारियां करती हैं। त्योहारों की रौनक पारंपरिक पकवानों के बिना अधूरी लगती है। यही वजह है कि करवा चौथ पर सरगी से लेकर व्रत खोलने यानी पारण तक के लिए घरों में कई तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में इन पकवानों का स्वाद और बनाने का तरीका भी अलग होता है। कई रेसिपी ऐसी हैं, जो पीढ़ियों से परिवारों की परंपरा का हिस्सा बनी हुई हैं।

इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। त्योहार से पहले ही कपड़ों, गहनों, पूजन सामग्री और खानपान की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। आइए जानते हैं कि मध्य प्रदेश से लेकर पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश तक करवा चौथ पर कौन-कौन से पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं।

मध्य प्रदेश: गुलगुले और सुहाल का खास महत्व

मध्य प्रदेश में करवा चौथ के मौके पर मीठे पुए यानी गुलगुले बनाने की परंपरा है। इसके साथ सुहाल या मठरी भी तैयार की जाती है, जो मीठी और नमकीन दोनों तरह की हो सकती है। कई परिवारों में सास अपनी बहू को ये पकवान देती हैं और इन्हें सरगी में भी शामिल किया जाता है।

व्रत खोलने के लिए कुछ घरों में बिना लहसुन-प्याज के भोजन बनाया जाता है। इसमें कद्दू की सब्जी जैसे व्यंजन शामिल हो सकते हैं। वहीं, मीठे पकवानों में मोहनभोग भी कई जगह पसंद किया जाता है।

उत्तर प्रदेश: कढ़ी, खीर और जलेबी का स्वाद


उत्तर प्रदेश में करवा चौथ का त्योहार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। यहां शाम की पूजा के लिए कई घरों में बेसन की कढ़ी बनाई जाती है। इसके साथ खीर या सेवई जैसी मिठाइयां भी तैयार की जाती हैं।

कुछ परिवारों में सरगी के दौरान या करवा चौथ से एक रात पहले दूध और जलेबी खाने की परंपरा भी है। हालांकि, खानपान से जुड़ी ये रस्में क्षेत्र और परिवार के हिसाब से अलग-अलग हो सकती हैं।

पंजाब और हरियाणा: सरगी में सुतरफेनी, पारण में मां की दाल


पंजाब और हरियाणा में करवा चौथ की सरगी में सुतरफेनी का खास स्थान है। इसे आमतौर पर दूध में भिगोकर खाया जाता है। सरगी की थाली में मठरी, सूखे मेवे, नट्स और फल भी शामिल किए जाते हैं।

व्रत खोलने के लिए कई घरों में उड़द या मूंग की दाल बनाई जाती है, जिसे कुछ जगहों पर मां की दाल भी कहा जाता है। मीठे में चूरमा और खीर जैसे पारंपरिक पकवान तैयार किए जाते हैं। घर में बना सफेद मक्खन भी कई परिवारों की थाली का हिस्सा होता है।

उत्तराखंड: चावल के फर्रे और अरसे की मिठास


उत्तराखंड में करवा चौथ के मौके पर कुछ परिवारों में चावल के आटे से पिट्ठा या फर्रे बनाए जाते हैं। इन्हें भाप में पकाया जाता है या पानी में उबाला जाता है। इनका स्वाद और बनाने का तरीका स्थानीय परंपराओं के अनुसार बदल सकता है।

त्योहारों और शुभ अवसरों पर यहां अरसा नाम की पारंपरिक मिठाई भी बनाई जाती है। इसके अलावा झंगोरे की खीर भी पहाड़ी खानपान की खास पहचान है, जिसे कई घरों में खास मौकों पर तैयार किया जाता है।

हिमाचल प्रदेश: फेनी, मित्था और राजमा मद्रा


हिमाचल प्रदेश में करवा चौथ की सरगी में दूध, चीनी और सूखे मेवों के साथ फेनी या सेवई खाने का चलन है। शाम को व्रत खोलने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय परंपराओं के मुताबिक सात्विक भोजन तैयार किया जाता है।

हिमाचली खानपान में राजमा मद्रा की खास पहचान है। इसके अलावा कुछ जगहों पर काले चने का खट्टा, बूंदी और मित्था यानी मीठे चावल जैसे पकवान भी बनाए जाते हैं। इन व्यंजनों का चुनाव परिवार की पसंद और स्थानीय रीति-रिवाजों पर निर्भर करता है।

हर राज्य के पकवानों में छिपी है परंपरा


करवा चौथ पर बनने वाले पकवान सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये परिवारों की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को भी आगे बढ़ाते हैं। कहीं सरगी में सुतरफेनी खाई जाती है, तो कहीं गुलगुले, फर्रे या अरसे बनाए जाते हैं। हालांकि, हर घर में सभी पकवान बनाना जरूरी नहीं है। कौन-सा व्यंजन तैयार होगा, यह स्थानीय परंपरा, परिवार की पसंद और उपलब्ध सामग्री के अनुसार तय होता है।

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