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राज्यपाल गो बैक, गो बैक...., आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष का हंगामा

लखनऊ। यूपी विधानमंडल का बजट सत्र की आज (18 फरवरी) से शुरूआत हो गयी है। पहले दिन विधानसभा और विधान परिषद के संयुक्त सदन को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल (Governor Anandiben Patel) ने संबोधित किया। इस दौरान विपक्ष ने जोरदार…

24GhanteOnline
February 18, 2025
3 min read

लखनऊ। यूपी विधानमंडल का बजट सत्र की आज (18 फरवरी) से शुरूआत हो गयी है। पहले दिन विधानसभा और विधान परिषद के संयुक्त सदन को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल (Governor Anandiben Patel) ने संबोधित किया। इस दौरान विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। सपा के सदस्यों ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान ‘राज्यपाल गो बैक’ के नारे लगाए।

दरअसल, इस वर्ष का यह पहला सत्र है और पिछले एक वर्ष का सबसे लंबा सत्र होगा जो 5 मार्च तक चलेगा। 20 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आम बजट पेश किया जाएगा। इस बार के बजट का आकार 8 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। वहीं, मिल्कीपुर उपचुनाव और महाकुंभ भगदड़ समेत कई मुद्दों पर सदन में हंगामें के आसार नजर आ रहे थे।

बजट सत्र शुरू होने से पहले मंगलवार को सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा अस्थि कलश लेकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने कहा कि नैतिकता का अस्थि कलश लोकतंत्र के मंदिर में स्थापित करेंगे। महाकुंभ का मुद्दा उठाएंगे, सरकार का घेराव करेंगे, हर सवाल करेंगे। वहीं, सपा विधायक अतुल प्रधान ने बेड़ियों में विरोध प्रदर्शन किया।

बजट सत्र से पहले सीएम योगी का बयान


बजट सत्र पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘आज विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही राज्यपाल सदन को संबोधित करेंगे। इसके बाद कल से राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन में चर्चा भी होगी। 20 फरवरी को सदन में उत्तर प्रदेश का वर्ष 2025-26 का आम बजट पेश किया जाएगा। सत्र 18 फरवरी से 5 मार्च तक प्रस्तावित किया गया है। उत्तर प्रदेश के इतिहास में ऐसे बहुत कम अवसर आए हैं जब इतने लंबे समय तक सत्र आहूत किया गया हो। लेकिन सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से पूरी होनी चाहिए। यह केवल सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि विपक्ष की भी उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।’

सीएम योगी ने आगे कहा, ‘सदन चर्चा का मंच बनना चाहिए। पिछले करीब 8 वर्षों में डबल इंजन वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार ने उत्तर प्रदेश के विकास के जो मानक स्थापित किए हैं, वे अभूतपूर्व हैं। इसकी झलक अभिभाषण के साथ-साथ सदन के अंदर चर्चाओं के जरिए भी देखने को मिलती है।

महाकुम्भ से साकार हुई एक भारत-श्रेष्ठ भारत की अवधारणा : राज्यपाल


स्वाभाविक रूप से हताश और निराश विपक्ष इन मुद्दों पर चर्चा करने से भागने की कोशिश करता है और इसमें बाधाएं खड़ी करने की कोशिश करता है सदन की कार्यवाही में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है। अगर विपक्ष सार्थक चर्चा को आगे बढ़ाने में मदद करता है, तो मेरा अनुमान है कि यह सत्र बहुत अच्छा हो सकता है।”

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