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20वें दिन भी अन्न का एक दाना नहीं खाया! सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल जारी

जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा आंदोलन उग्र होता जा रहा है। 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन (Sonam Wangchuk Hunger Strike) का आज 20वां दिन है। शुक्रवार को…

24GhanteOnline
July 17, 2026
4 min read
20वें दिन भी अन्न का एक दाना नहीं खाया! सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल जारी

जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा आंदोलन उग्र होता जा रहा है। 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन (Sonam Wangchuk Hunger Strike) का आज 20वां दिन है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी अनशन स्थल पहुंचकर छात्रों के हितों से जुड़ी मांगों का समर्थन किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अड़े प्रदर्शनकारियों के कारण इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

अनशन स्थल पर तैनात डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम सोनम वांगचुक के लगातार गिरते स्वास्थ्य और शारीरिक मापदंडों को लेकर बेहद चिंतित है और उन्होंने एक गंभीर मेडिकल बुलेटिन जारी किया है। डॉक्टरों के आधिकारिक परीक्षण के अनुसार, पिछले 20 दिनों से अन्न का एक भी दाना न लेने के कारण वांगचुक का कुल वजन नौ किलो से अधिक घट चुका है और उनका रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) भी निरंतर खतरनाक स्तर तक कम हो रहा है। अनशन स्थल पर उनकी जांच कर रहे वरिष्ठ डॉक्टर सतीश लांबा ने मेडिकल रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि लंबे समय तक भूखे रहने के कारण उनके शरीर में अत्यधिक कमजोरी आ गई है। शुक्रवार को जांच के दौरान सोनम वांगचुक का कुल शारीरिक वजन महज 56.55 किलोग्राम दर्ज किया गया, जिसमें पिछले 24 घंटों के भीतर ही 350 ग्राम की भारी गिरावट आई है। इसके अतिरिक्त, उनका वर्तमान ब्लड प्रेशर 108/68, ब्लड शुगर का स्तर 70 mg/dL और हृदय गति (हार्ट रेट) 72 बीट्स प्रति मिनट रिकॉर्ड की गई है।


चिकित्सकों ने आगाह किया है कि उनके शरीर में हल्का डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) भी शुरू हो चुका है। डॉक्टर लांबा ने मानव शरीर विज्ञान के नियमों का हवाला देते हुए एक बड़ी चेतावनी दी कि लंबे समय तक भोजन न मिलने के कारण शुरुआती चरणों में जहां शरीर की अतिरिक्त चर्बी (फैट) घटी और उसके बाद मांसपेशियां (मसल्स) कमजोर होने लगीं; वहीं अब यह अनशन अपने सबसे खतरनाक यानी तीसरे चरण में पहुंच चुका है, जहां सीधे तौर पर उनके आंतरिक अंगों (इंटरनल ऑर्गन्स) के बुरी तरह प्रभावित होने और उनके फेल होने की आशंका बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इस गंभीर शारीरिक संकट और डॉक्टरों की विधिक चेतावनियों के बावजूद भूख हड़ताल पर दृढ़ता से डटे सोनम वांगचुक ने संकल्प दोहराते हुए कहा, 'मैं किसी भी हालत में आगामी 20 जुलाई तक हर हाल में जीवित रहूंगा, ताकि आप सभी न्यायप्रिय लोगों के साथ मिलकर संसद तक मार्च कर सकूं। अगर 20 जुलाई को हमारा यह शांतिपूर्ण मार्च सफल नहीं हुआ, तो मैं भूत बनकर वापस आऊंगा लेकिन छात्रों को न्याय दिलाकर रहूंगा।'


सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर मुख्य रूप से 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संस्थापक के समर्थन और उनके विधिक आह्वान पर इस कठिन अनशन पर बैठे हैं। पार्टी और प्रदर्शनकारियों का यह सीधा व स्पष्ट आरोप है कि मई महीने में आयोजित हुई नीट (NEET) परीक्षा के दौरान देश भर में जो व्यापक पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, उससे देश के लाखों होनहार छात्रों का भविष्य पूरी तरह अधर में लटक गया है और उनकी मानसिक व शैक्षणिक स्थिति प्रभावित हुई है। इसी प्रशासनिक विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए आंदोलनकारी लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।


इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के केंद्रीय नेतृत्व ने एक बड़ी रणनीतिक घोषणा की है कि देश की संसद के आगामी मानसून सत्र के ठीक पहले दिन, यानी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। सीजेपी ने इस विधिक मार्च को सफल बनाने के लिए देश के कोने-कोने से पीड़ित छात्रों, चिंतित अभिभावकों और आम जागरूक नागरिकों से भारी संख्या में दिल्ली पहुंचने और इस आंदोलन का हिस्सा बनने की भावुक अपील की है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं हो जाता और देश की पूरी परीक्षा प्रणाली में तकनीकी व प्रशासनिक पारदर्शिता लाने के लिए ठोस कानूनी सुधार नहीं किए जाते, तब तक उनका यह लोकतांत्रिक धरना और अनशन विधिक रूप से जारी रहेगा।

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