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मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर भद्रा का साया, जानें स्नान-दान का मुहूर्त

हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष पूर्णिमा बहुत महत्वपूर्ण और विशेष मानी गई है। मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा (Margashirsha Purnima) के दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से संपन्न होता है और वातावरण में सकारात्मक उर्जा…

24GhanteOnline
November 29, 2025
2 min read

हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष पूर्णिमा बहुत महत्वपूर्ण और विशेष मानी गई है। मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा (Margashirsha Purnima) के दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से संपन्न होता है और वातावरण में सकारात्मक उर्जा बढ़ाता है। इस दिन चंद्र देव की पूजा का विधान भी है। इस दिन चंद्र देव और जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में दुख-दरिद्रता नहीं आती।

जीवन हमेशा खुशहाल रहता है। हालांकि इस साल मार्गशीर्ष पूर्णिमा भद्रा के साए में रहेगी। ऐसे में आइए जानते हैं कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भद्रा काल कब तक रहेगा? साथ ही जानते हैं इस दिन स्नान-दान का मुहूर्त।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा (Margashirsha Purnima) कब है?


मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि अगले महीने 04 दिसंबर को सुबह 08 बजकर 37 मिनट पर प्रारंभ होगी। वहीं इस तिथि का समापन 05 दिसंबर को सुबह 4 बजकर 43 पर होगा। ऐसे में मार्गशीर्ष पूर्णिमा 04 दिसंबर को मनाई जाएगी। इस दिन इसका व्रत और स्नान-दान किया जाएगा।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा (Margashirsha Purnima) पर भद्रा का साया


ज्योतिष गणना के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन सुबह में 8 बजकर 36 मिनट पर भद्रा काल शुरू होगा। भद्रा काल शाम 6 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। हालांकि, मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भद्रा काल का प्रभाव धरती लोक पर नहीं रहेगा, क्योंकि भद्रा का वास स्वर्ग लोक में रहेगा।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा (Margashirsha Purnima) स्नान-दान मुहूर्त


मार्गशीर्ष पूर्णिमा (Margashirsha Purnima) यानी 4 दिसंबर की सुबह 4 बजकर 19 मिनट से सुबह 04 बजकर 58 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहने वाला है। इस शुभ घड़ी में गंगा या अन्य किसी भी पवित्र नदी के तट पर जाकर स्नान किया जा सकता है। अगर किसी पवित्र नदी तक जाना संभव न हो तो इस मुहूर्त में घर के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इसके बाद क्षमतानुसार दान किया जा सकता है।

इस दिन सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहने वाला है। इस समय में पूजा-पठ या धार्मिक अनुष्ठान किया जा सकता है। रात 11 बजकर 45 मिनट से रात 12 बजकर 39 बजे तक निशीथ काल की पूजा होगी। इस शुभ घड़ी में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है।

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