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Ram Temple Donation Controversy: पीएमओ की एंट्री, आज अयोध्या पहुंचेगी एसआईटी

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर (Ram Temple) में दानपात्रों से चढ़ावे की संपत्ति के कथित गबन का मामला लगातार गहराता जा रहा है, जिसकी गंभीरता को देखते हुए अब केंद्र और राज्य सरकारें पूरी तरह से सक्रिय हो गई हैं। रविवार…

24GhanteOnline
June 15, 2026
4 min read
Ram Temple Donation Controversy: पीएमओ की एंट्री, आज अयोध्या पहुंचेगी एसआईटी

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर (Ram Temple) में दानपात्रों से चढ़ावे की संपत्ति के कथित गबन का मामला लगातार गहराता जा रहा है, जिसकी गंभीरता को देखते हुए अब केंद्र और राज्य सरकारें पूरी तरह से सक्रिय हो गई हैं। रविवार को अयोध्या के प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर रही कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की तरफ से एक अत्यंत वरिष्ठ अधिकारी ने अचानक मंदिर परिसर का दौरा किया है, जो अपने स्तर पर इस पूरे संवेदनशील वित्तीय घोटाले की गुप्त पड़ताल कर सीधे पीएमओ को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। दूसरी तरफ, शनिवार को श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के लिखित अनुरोध और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश के बाद शासन द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया गया है। इस हाई-प्रोफाइल एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज (लखनऊ) किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन जैसे आला अधिकारियों को शामिल किया गया है।

यह टीम सोमवार को अयोध्या पहुंचकर अपनी जांच शुरू करेगी, जिसके तहत ट्रस्ट के पदाधिकारियों से पूछताछ करने के साथ-साथ चिन्हित संदिग्धों और बैंक कर्मियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। एसआईटी केवल धन के लेन-देन और तकनीकी पहलुओं की ही जांच नहीं करेगी, बल्कि इस बात का भी पता लगाएगी कि क्या इस गबन को किसी स्तर पर प्रशासनिक संरक्षण या मिलीभगत प्राप्त थी। हालांकि, इस पूरे मामले में हैरान करने वाली बात यह है कि एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने और गबन के पुख्ता साक्ष्य मिलने के बावजूद भी अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं कराई गई है।

इस बड़े विवाद के बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने रविवार को स्वयं श्रीराम जन्मभूमि परिसर का दौरा कर वहां रखी दानपेटियों और चढ़ावे के संपूर्ण प्रबंधन तंत्र का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने रामलला के गर्भगृह में जाकर दानपात्रों की भौतिक स्थिति देखी और चढ़ावा संग्रह से लेकर उसे बैंक में सुरक्षित जमा कराने तक की पूरी सुरक्षा कड़ियों की जानकारी ली। राज्य सरकार की कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए मिश्र ने कहा कि सरकार ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और 24 घंटे से भी कम समय में एक उच्चस्तरीय एसआईटी का गठन कर दिया है, जिसकी हर एक संस्तुति को मंदिर प्रशासन द्वारा पूरी तरह लागू किया जाएगा।

इसी बीच, मंदिर प्रशासन ने भविष्य में ऐसी किसी भी चोरी को रोकने के लिए ट्रस्ट कार्यालय में एक नया और अत्याधुनिक उच्च सुरक्षा वाला लॉकर स्थापित कर दिया है, जिसे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपनी सीधी देखरेख में लगवाया है ताकि दान में प्राप्त नकदी और बहुमूल्य आभूषणों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके। दूसरी तरफ, राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर जिला प्रशासन से मिलकर एफआईआर दर्ज कराने का एलान करने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व सांसद विनय कटियार रविवार को बिना किसी अधिकारी से मिले अचानक लखनऊ के लिए रवाना हो गए, जबकि उन्होंने पूर्व में दोषियों को जेल भेजने की पुरजोर वकालत की थी।

इस संवेदनशील मुद्दे पर अब उत्तर प्रदेश की सियासत भी पूरी तरह से गरमा गई है और विपक्ष ने सरकार व ट्रस्ट को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ सांसद अवधेश प्रसाद ने रविवार को सिविल लाइंस स्थित एक होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे घोटाले पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह कोई सामान्य वित्तीय हेराफेरी का मामला नहीं है, बल्कि विश्व भर के करोड़ों सनातनियों और रामभक्तों की अगाध आस्था और भावनाओं पर किया गया एक क्रूर कुठाराघात है।

सपा सांसद ने प्रदेश सरकार द्वारा गठित की गई एसआईटी पर अविश्वास जताते हुए मांग की कि इस पूरे महाघोटाले की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) की सीधी निगरानी में एक स्वतंत्र समिति बनाकर कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने देश के शीर्ष नेतृत्व से यह बड़ी मांग भी की कि वर्तमान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया जाए और इसके तहत कार्यरत सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों को उनके पदों से तुरंत बर्खास्त किया जाए, जिससे अब यह मामला कानूनी और प्रशासनिक जांच के साथ-साथ एक बड़े राजनीतिक द्वंद्व में तब्दील हो चुका है।

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