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राम मंदिर केस: SIT को 15 दिन का एक्सटेंशन, अब इस दिन रिपोर्ट होगी पेश

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Donation case) मामले की परतें खोलने में जुटी विशेष जांच समिति (SIT) को शासन की ओर से बड़ी राहत मिली है। मामले की गहराई और वित्तीय लेन-देन के व्यापक नेटवर्क को देखते हुए एसआईटी…

24GhanteOnline
July 1, 2026
3 min read
राम मंदिर केस: SIT को 15 दिन का एक्सटेंशन, अब इस दिन रिपोर्ट होगी पेश

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Donation case) मामले की परतें खोलने में जुटी विशेष जांच समिति (SIT) को शासन की ओर से बड़ी राहत मिली है। मामले की गहराई और वित्तीय लेन-देन के व्यापक नेटवर्क को देखते हुए एसआईटी को जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। पूर्व में सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट और अब तक हुई आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद, जांच टीम अब 15 जुलाई 2026 को अपनी अंतिम और विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।

एसआईटी की अब तक की जांच में कई चौंकाने वाले वित्तीय खुलासे हुए हैं। जांच में यह साफ हुआ है कि आरोपियों ने किसी एक बड़ी वारदात के बजाय लंबे समय तक टुकड़ों-टुकड़ों में मंदिर के चढ़ावे की एक बड़ी धनराशि पार की। इस चोरी की गई 'ब्लैक मनी' को आरोपियों द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश (इन्वेस्ट) किए जाने के भी पुख्ता सबूत मिले हैं, जिसकी कड़ियां जोड़ने के लिए पुलिस को इस अतिरिक्त समय की सख्त आवश्यकता थी।

जेल में दो घंटे की कड़ी पूछताछ, अविनाश से खुले राज


न्यायालय से विशेष अनुमति मिलने के बाद पुलिस और एसआईटी की संयुक्त टीम ने मंगलवार को जेल में बंद सभी आरोपियों से करीब दो घंटे तक सघन पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, इस पूछताछ के दौरान सबसे लंबा समय आरोपी अविनाश मिश्रा के साथ बिताया गया, क्योंकि चोरी की गई राशि की सबसे बड़ी रिकवरी (बरामदगी) उसी के पास से हुई थी। पूछताछ में आरोपियों ने करोड़ों रुपये की चोरी की बात कबूल करते हुए पूरे घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया। इस दौरान आरोपियों ने एक बार फिर ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के नाम का उल्लेख किया और बताया कि दान राशि की गिनती (गणना) से जुड़ी पूरी प्रक्रिया और उसकी निगरानी में अनिल मिश्रा की मुख्य भूमिका रहती थी।

चाबियों का खेल और बैंक कर्मियों की मिलीभगत


इस पूरे प्रकरण की शुरुआत बीते बृहस्पतिवार को मुकदमा दर्ज होने के साथ हुई थी, जिसके बाद शुक्रवार को चंपत राय के बेहद करीबी माने जाने वाले टिन्नू यादव, गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव समेत गणनाकर्मी अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश और अवनीश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

जेल में हुई पूछताछ से यह साफ हो गया है कि यह एक सोची-समझी प्रशासनिक और वित्तीय चूक का नतीजा था। सूत्रों के अनुसार, चढ़ावे के गणना कक्ष (काउंटिंग रूम) की एक चाबी मुख्य आरोपी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक कर्मियों के पास सुरक्षित होती थी। इन दोनों पक्षों ने आपसी मिलीभगत और मजबूत सांठगांठ के जरिए तिजोरी से भारी रकम गायब की और आपस में बांट ली। अब एसआईटी इस बात की जांच कर रही है कि इस सिंडिकेट में बैंक के कौन से बड़े अधिकारी शामिल थे और इस निवेश का मुख्य जरिया क्या था।

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