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देवशयनी एकादशी के दिन करें ये उपाय, घर में आएगी सुख-समृद्धि

सनातन धर्म में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन से भगवान श्री हरि विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि के…

24GhanteOnline
July 25, 2026
2 min read
देवशयनी एकादशी के दिन करें ये उपाय, घर में आएगी सुख-समृद्धि

सनातन धर्म में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन से भगवान श्री हरि विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव संभालते हैं। इस पवित्र अवसर पर माता लक्ष्मी के स्वरूप और भगवान विष्णु की परम प्रिय तुलसी की विशेष पूजा-अर्चना करने से घर में सुख, समृद्धि और संपन्नता का वास होता है।

तुलसी पर अर्पित करें ये खास चीजें




  • कच्चे दूध मिला जल: एकादशी की सुबह स्नान के बाद तुलसी में जल चढ़ाते समय उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध और गंगाजल जरूर मिलाएं। इससे घर की आर्थिक तंगी दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।




  • लाल चुनरी और श्रृंगार सामग्री: माता लक्ष्मी के स्वरूप तुलसी जी को लाल चुनरी चढ़ाएं। इसके साथ ही रोली, सिंदूर, हल्दी और अक्षत अर्पित करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है।




  • पीले फूल और पीला कलावा: श्री हरि विष्णु के प्रिय पीले रंग का ध्यान रखते हुए तुलसी जी को पीले गेंदे के फूल या पीली मिठाई का भोग लगाएं। साथ ही तुलसी के तने पर पीला कलावा बांधकर मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।




  • संध्याकाल में घी का दीपक: शाम के समय तुलसी के समीप शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं और 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ऊं श्री तुलस्यै नमः' मंत्र का जाप करें। इससे घर के वास्तु दोष दूर होते हैं और धन लाभ का मार्ग प्रशस्त होता है।




इस दिन भूलकर भी ना करें ये काम 




  • तुलसी दल न तोड़ें: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना सख्त वर्जित माना गया है। यदि पूजा या भोग के लिए तुलसी पत्रों की आवश्यकता हो, तो उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।




  • संध्या समय जल देने से बचें: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन तुलसी जी निर्जला व्रत रखती हैं, इसलिए शाम के समय पौधे में जल अर्पित न करें, केवल दीपदान और पूजा-अर्चना करें।




  • cleanliness एवं पवित्रता: तुलसी के पौधे के आसपास हमेशा स्वच्छता बनाए रखें और जूते-चप्पल जैसी वस्तुएं वहां न रखें।



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