24 घण्टे ऑनलाइन

माघ पूर्णिमा पर करें शिव पूजन, रुद्राभिषेक का महत्व और विधि

माघ मास की पूर्णिमा को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी तिथि माना गया है। इस दिन भगवान शिव की आराधना करने का विशेष महत्व बताया गया है। माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) 1 फरवरी को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी।…

24GhanteOnline
February 1, 2026
3 min read

माघ मास की पूर्णिमा को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी तिथि माना गया है। इस दिन भगवान शिव की आराधना करने का विशेष महत्व बताया गया है। माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) 1 फरवरी को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी को सुबह 5:52 बजे से प्रारंभ होकर 2 फरवरी को रात 3:38 बजे तक रहेगी। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि माघ पूर्णिमा पर शिव पूजन, रुद्राभिषेक और मंत्र जप करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और मानसिक व शारीरिक कष्टों से राहत मिलती है। यह दिन विशेष रूप से शिव कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

शास्त्रों के अनुसार, माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) पर भगवान शिव की पूजा करने से साधक को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। स्कंद पुराण में उल्लेख मिलता है कि पूर्णिमा तिथि शिव तत्व से जुड़ी होती है, इसलिए इस दिन की गई शिव आराधना शीघ्र फल प्रदान करती है। मान्यता है कि माघ पूर्णिमा पर शिव पूजन करने से जीवन के कष्ट, भय और रोग दूर होते हैं। यह तिथि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक मानी जाती है। श्रद्धा भाव से शिवलिंग पर जल अर्पित करने वाला भक्त अपने जीवन में स्थिरता, संतुलन और मानसिक शांति का अनुभव करता है।

रुद्राभिषेक का महत्व और विधि


माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) के दिन रुद्राभिषेक को अत्यंत फलदायी माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस तिथि पर किया गया रुद्राभिषेक कई गुना पुण्य प्रदान करता है। रुद्राभिषेक के दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और शुद्ध जल से अभिषेक किया जाता है। इसके साथ ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप किया जाता है। मान्यता है कि रुद्राभिषेक करने से ग्रह दोष, विशेष रूप से चंद्र और राहु से जुड़े कष्ट शांत होते हैं। यह अभिषेक मानसिक तनाव को कम कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

मंत्र जप और ध्यान से कैसे मिलती है शिव कृपा?


माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) पर मंत्र जप और ध्यान का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से भय, रोग और नकारात्मक विचारों का नाश होता है। ध्यान के समय भगवान शिव के शांत और करुण स्वरूप का स्मरण करने से मन स्थिर होता है। मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन किया गया मंत्र जप सामान्य दिनों की तुलना में अधिक प्रभावशाली होता है। यदि साधक इस दिन मौन, संयम और श्रद्धा के साथ जप करता है, तो उसे मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।

माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) पर शिव पूजन में क्या-क्या करें?


शास्त्रों के अनुसार, माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) के दिन प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद शिव पूजन करना चाहिए। शिवलिंग पर जल अर्पित करें और बेलपत्र, धतूरा, भस्म तथा पुष्प अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर विधिवत पूजा करें। इस दिन दान का भी विशेष महत्व बताया गया है, विशेषकर सफेद वस्त्र, अन्न या दूध का दान पुण्यदायी माना जाता है।

मान्यता है कि माघ पूर्णिमा पर नियम, श्रद्धा और संयम के साथ किया गया शिव पूजन भक्त को शिव कृपा के साथ जीवन में स्थायी शांति और संतुलन प्रदान करता है।

इस खबर को लाइक और शेयर करें

Comments (0)

0/2000 characters

Facebook टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए Facebook में लॉगिन करें

टिप्पणियां अक्षम हैं। व्यवस्थापक से संपर्क करें।