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अफसरों पर भी हो कार्रवाई... पेपर लीक मामले में बोलीं मायावती

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती (Mayawati) ने देश में पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था और बढ़ती बेरोजगारी को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर…

24GhanteOnline
July 20, 2026
2 min read

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती (Mayawati) ने देश में पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था और बढ़ती बेरोजगारी को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन गंभीर मुद्दों पर संसद से लेकर सड़कों तक विरोध देखने को मिल रहा है और सबसे अधिक नुकसान देश के युवाओं को उठाना पड़ रहा है।

सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में मायावती ने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं सहित विभिन्न प्रतियोगी और सरकारी भर्ती परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक और परीक्षाएं रद्द होने की घटनाओं ने करोड़ों युवाओं के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है। उन्होंने मांग की कि परीक्षा प्रणाली में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि युवाओं का भरोसा दोबारा कायम हो सके।

सरकारी शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत

बसपा प्रमुख ने कहा कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव होने के कारण अभिभावक मजबूरी में निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों का रुख कर रहे हैं। महंगाई के इस दौर में बच्चों की पढ़ाई का खर्च परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बनता जा रहा है।

उन्होंने सरकारों से आग्रह किया कि प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। साथ ही कोचिंग संस्थानों की पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षा व्यवसाय नहीं बल्कि गुणवत्तापूर्ण व्यवस्था का माध्यम बन सके।

युवा चाहते हैं स्थायी रोजगार

मायावती ने कहा कि देश का युवा आउटसोर्सिंग जैसी अस्थायी और कम वेतन वाली नौकरियों से संतुष्ट नहीं है। उन्हें सम्मानजनक, सुरक्षित और स्थायी रोजगार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने शिक्षित और आत्मनिर्भर समाज का सपना देखा था और उसी दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो बढ़ सकते हैं आंदोलन

बसपा सुप्रीमो ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकारें समय रहते युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं करतीं, तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन इस बढ़ते असंतोष का संकेत हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।

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