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पूरी दुनिया भगवान बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता को स्वीकार कर रही : केशव प्रसाद मौर्य

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Maurya) आज वाराणसी स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हायर तिब्बतन स्टडीज के ऑडिटोरियम में आषाढ़ पूर्णिमा दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि…

24GhanteOnline
July 29, 2026
3 min read
पूरी दुनिया भगवान बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता को स्वीकार कर रही : केशव प्रसाद मौर्य

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Maurya) आज वाराणसी स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हायर तिब्बतन स्टडीज के ऑडिटोरियम में आषाढ़ पूर्णिमा दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने भगवान बुद्ध की प्रथम धम्मदेशना-स्थली सारनाथ की गौरवशाली परंपरा का स्मरण करते हुए कहा कि आषाढ़ पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता, करुणा, अहिंसा और विश्व शांति का सार्वभौमिक संदेश देने वाला पावन दिवस है।

उपमुख्यमंत्री श्री मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत भगवान बुद्ध की करुणा, अहिंसा और शांति की अमर धरोहर को विश्वभर में नई ऊर्जा और नई प्रतिष्ठा प्रदान कर रहा है। आज भारत अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास के साथ जोड़ते हुए विश्व समुदाय के समक्ष एक नई पहचान स्थापित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि उन्हें विभिन्न देशों की यात्रा के दौरान भगवान बुद्ध के प्रति विश्वभर में अपार श्रद्धा और भारत के प्रति सम्मान को निकट से देखने का अवसर मिला। रूस यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां भगवान बुद्ध के प्रति लोगों की गहरी आस्था और भारत के प्रति जो सम्मान देखने को मिला, उसकी व्याख्या शब्दों में नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यह भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक शक्ति और आध्यात्मिक विरासत का परिणाम है।

श्री मौर्य ने कहा कि सम्राट अशोक की विरासत ने भगवान बुद्ध के विचारों को संपूर्ण विश्व तक पहुंचाया और आज डबल इंजन सरकार उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए भगवान बुद्ध से जुड़े सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों को सड़क, रेल और हवाई मार्ग से सशक्त रूप से जोड़ रही है। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं तथा बौद्ध पर्यटन को नई गति मिली है।

उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की प्रथम धम्मदेशना-स्थली सारनाथ का यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह सम्मान केवल उत्तर प्रदेश या भारत का नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की साझा विरासत का सम्मान है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता, हिंसा और संघर्ष के वर्तमान दौर में भगवान बुद्ध के कालातीत विचार आज भी मानव समाज को शांति, सह-अस्तित्व और सद्भाव का मार्ग दिखा रहे हैं।

उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज जी की 650वीं जयंती का भी उल्लेख करते हुए प्रदेश एवं देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी ने सामाजिक समरसता, समानता और मानव सेवा का जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने सभी नागरिकों से उनके आदर्शों और उपदेशों का अनुसरण करने का आह्वान किया।

श्री मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, धार्मिक पर्यटन के विकास तथा आध्यात्मिक स्थलों के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। काशी, सारनाथ, अयोध्या, मथुरा और अन्य पवित्र स्थलों का विकास भारत की सांस्कृतिक चेतना को और अधिक सशक्त बना रहा है तथा इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव आदरणीय शार्त्से खेंसुर जंगचुप चोएडेन रिम्पोचे, केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के कुलपति डॉ. वांगचुक दोरजी नेगी, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महानिदेशक राघव प्रसाद भटनागर, भारत-श्रीलंका अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संघ के अध्यक्ष आदरणीय डॉ. के. सिरी सुमेधा थेरो, सम्मानित भिक्षुगण तथा देश-विदेश से पधारे अनेक विशिष्ट अतिथि एवं गणमान्यजन गरिमामयी रूप से उपस्थित रहे।

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