ज्येष्ठ मास आज से शुरू, जानें इस महीने का महत्व
पंचांग के अनुसार, चैत्र और वैशाख के बाद आने वाला ज्येष्ठ मास (Jyeshtha Month) इस वर्ष कल से आरंभ हो रहा है। यह महीना विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व रखता है। सूर्य के अधिक तीव्र होने और तापमान के चरम पर…
पंचांग के अनुसार, चैत्र और वैशाख के बाद आने वाला ज्येष्ठ मास (Jyeshtha Month) इस वर्ष कल से आरंभ हो रहा है। यह महीना विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व रखता है। सूर्य के अधिक तीव्र होने और तापमान के चरम पर पहुंचने के कारण यह माह शरीर और आत्मा की तपस्या, संयम और सेवा का प्रतीक माना जाता है।यह महीना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सेवा का भी प्रतीक है। सड़कों पर प्यासे लोगों को पानी पिलाना, गरीबों को शीतल पेय और छाया देना, पशु-पक्षियों के लिए जल पात्र रखना ये सभी परंपराएं हमें दूसरों की मदद करना सिखाती हैं।
ज्येष्ठ माह (Jyeshtha Month) कब से कब तक?
पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ माह की शुरुआत 13 मई 2025, मंगलवार से हो रही है और इसका समापन 11 जून 2025, बुधवार को होगा।
धार्मिक दृष्टिकोण से महत्व
महत्व
ज्येष्ठ माह में विशेष रूप से पानी पिलाना, दान करना, और व्रत-उपवास रखने का विशेष महत्व बताया गया है। इस महीने को धर्म, तप और सेवा का माह कहा गया है।
देवताओं की पूजा
मान्यता के अनुसार, इस महीने में हनुमान जी, भगवान राम, सूर्य देव और वरुण देव की पूजा का विशेष महत्व है।
गंगा स्नान
पूरे ज्येष्ठ महीने में गंगा या पवित्र नदियों में स्नान करना पुण्यकारी माना जाता है। इससे पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
बड़ा मंगल
उत्तर भारत, खासकर लखनऊ और आस-पास के क्षेत्रों में ‘बड़ा मंगल’ मनाया जाता है। यह ज्येष्ठ माह के हर मंगलवार को आता है और हनुमान जी की विशेष पूजा होती है। जगह-जगह भंडारे, जल सेवा और हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन होता है।
सूर्य उपासना
इस माह सूर्यदेव की आराधना से स्वास्थ्य और ऊर्जा की प्राप्ति मानी जाती है। उगते सूर्य को जल अर्पण करना विशेष फलदायी बताया गया है।
प्रमुख व्रत और त्योहार
ज्येष्ठ मास में कई प्रमुख धार्मिक व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें अपरा एकादशी, शनि जयंती, वट सावित्री व्रत और गंगा दशहरा शामिल हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्व
गर्मी का महीना
ज्येष्ठ मास में गर्मी बहुत अधिक होती है। सूर्य देव अपना रौद्र रूप धारण कर लेते हैं, जिससे पानी की कमी हो जाती है।
जल संरक्षण
शास्त्रों में ज्येष्ठ मास में जल का संरक्षण करने पर विशेष महत्व दिया गया है। इस महीने में जल का सही और पर्याप्त उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
स्वास्थ्य
इस महीने में हरी सब्जियां, सत्तू और जल वाले फलों का सेवन लाभदायक होता है। दोपहर में आराम करना भी स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।
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