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कैश कांड में फंसे जस्टिस वर्मा, जांच में तीनों आरोप सही

पूर्व न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा (Yashwant Varma) से जुड़े कैश कांड में लोकसभा अध्यक्ष की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सही माना है। हालांकि, रिपोर्ट…

24GhanteOnline
August 12, 2026
2 min read
कैश कांड में फंसे जस्टिस वर्मा, जांच में तीनों आरोप सही

पूर्व न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा (Yashwant Varma) से जुड़े कैश कांड में लोकसभा अध्यक्ष की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सही माना है। हालांकि, रिपोर्ट में किसी साजिश के संकेत नहीं मिलने की बात कही गई है।

स्टोररूम में मिली थी बड़ी नकदी

मामला नई दिल्ली के 30, तुगलक क्रिसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास का है। रिपोर्ट के मुताबिक, घर के स्टोररूम में बड़ी संख्या में 500 रुपये के नोट मिले थे।

समिति ने कहा कि जस्टिस वर्मा यह संतोषजनक तरीके से नहीं बता सके कि नकदी वहां कैसे पहुंची, उसका स्रोत क्या था और उसका मालिक कौन था। इस आधार पर समिति ने संबंधित आरोप को सही माना।

सबूतों के संरक्षण पर भी सवाल

समिति ने स्टोररूम में मिले भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित नहीं रखने को गंभीर चूक माना। रिपोर्ट के अनुसार, स्टोररूम को कानूनी रूप से सील किए जाने और निरीक्षण से पहले उसकी स्थिति बदल चुकी थी।

इसके बाद वहां मौजूद नोट भी उपलब्ध नहीं रहे। समिति ने नकदी के बाद में कहां जाने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं पाई।

जवाब से संतुष्ट नहीं हुई समिति

जस्टिस वर्मा ने मामले में अपना पक्ष रखते हुए नकदी से किसी भी संबंध से इनकार किया था और साजिश की आशंका जताई थी। हालांकि, समिति ने उनके जवाब को परिस्थितियों के अनुरूप स्पष्ट और संतोषजनक नहीं माना।

रिपोर्ट में कहा गया कि स्वतंत्र गवाहों और अन्य साक्ष्यों से तुलना करने पर उनका जवाब टालमटोल वाला और असंतोषजनक पाया गया।

मार्च 2025 में सामने आया था मामला

यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था। जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम में आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में 500 रुपये के नोट मिलने की जानकारी सामने आई थी।

मामले की जांच के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12 अगस्त 2025 को तीन सदस्यीय समिति बनाई थी। बाद में समिति का पुनर्गठन किया गया।

समिति ने मई 2026 में अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी थी। जस्टिस वर्मा ने 9 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति को इस्तीफा सौंप दिया था। इसके बावजूद रिपोर्ट को संसद में पेश करने की प्रक्रिया जारी रही।

अब जांच समिति की रिपोर्ट में तीनों आरोप सही पाए जाने के बाद जस्टिस वर्मा से जुड़ा यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।

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