गिग वर्कर्स की आज महाहड़ताल, जानें कब से कब तक बंद रहेंगी सेवाएं
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी को लेकर आम जनता के साथ-साथ गिग वर्कर्स (ऐप आधारित कैब ड्राइवर और डिलीवरी पार्टनर्स) (Gig Workers) में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ईंधन के बढ़ते दामों और कंपनियों…
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी को लेकर आम जनता के साथ-साथ गिग वर्कर्स (ऐप आधारित कैब ड्राइवर और डिलीवरी पार्टनर्स) (Gig Workers) में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ईंधन के बढ़ते दामों और कंपनियों द्वारा कम भुगतान दरों के विरोध में गिग और प्लेटफॉर्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने शनिवार (16 मई) को एक अस्थायी राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। यूनियन ने देशभर के सभी ऐप-आधारित श्रमिकों से अपील की है कि वे अपनी आवाज बुलंद करने के लिए दोपहर 12:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक अपनी सेवाएं पूरी तरह बंद रखें।
सोशल मीडिया पर आंदोलन की गूंज और मांगें
यूनियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट साझा करते हुए सभी ड्राइवरों और डिलीवरी पार्टनर्स से एकजुट होने का आग्रह किया है। यूनियन का आरोप है कि लगातार बढ़ती महंगाई और ईंधन की लागत के बावजूद ऐप आधारित कंपनियां किराए और इंसेंटिव में कोई पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं कर रही हैं। ड्राइवरों का कहना है कि कंपनियों के भारी कमीशन और पेट्रोल-डीजल का खर्च निकालने के बाद उनके पास इतनी भी रकम नहीं बचती जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।
ईंधन की कीमतों में भारी उछाल
यह देशव्यापी आक्रोश सरकारी तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गई लगभग 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद फूटा है। इस वृद्धि के बाद देश के प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं:
दिल्ली: यहाँ पेट्रोल की कीमत लगभग 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर तक पहुँच गया है।
हैदराबाद: यहाँ कीमतें और भी अधिक हैं, जहाँ पेट्रोल 110.8 रुपये प्रति लीटर और डीजल 98.9 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है।
वैश्विक संकट बना कीमतों में तेजी का कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू स्तर पर दामों में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा संबंध वैश्विक परिस्थितियों से है। पश्चिम एशिया संकट और विशेष रूप से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में जारी भारी तनाव के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस भू-राजनीतिक संकट के चलते अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से छलांग लगाकर करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर पर पहुँच चुकी है, जिसका सीधा असर भारत में ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है।
श्रमिकों का दर्द और आगामी चेतावनी
सड़कों पर दिन-रात काम करने वाले मोहम्मद जैसे हजारों कैब ड्राइवरों और डिलीवरी बॉयज का कहना है कि ईंधन की लागत उनकी कुल कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा लील जाती है। ड्राइवरों का मानना है कि इस 5 घंटे की अस्थायी हड़ताल का मुख्य उद्देश्य सोई हुई ऐप कंपनियों और सरकार को जगाना है। यदि इस हड़ताल के बाद भी किराए की दरों में संशोधन नहीं किया गया और बढ़ती महंगाई से राहत नहीं मिली, तो गिग वर्कर्स आने वाले दिनों में एक बड़े और अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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