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भाजपा के पूर्व मंत्री दलवीर सिंह के पौत्र विजय की सपा में एंट्री, टिकट को लेकर अटकलें तेज

अलीगढ़: पूर्व मंत्री ठाकुर दलवीर सिंह के छोटे पौत्र विजय सिंह उर्फ पप्पू के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के साथ बरौली की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। गुरुवार को लखनऊ में उन्होंने सपा की सदस्यता…

24GhanteOnline
September 18, 2026
2 min read
भाजपा के पूर्व मंत्री दलवीर सिंह के पौत्र विजय की सपा में एंट्री, टिकट को लेकर अटकलें तेज

अलीगढ़: पूर्व मंत्री ठाकुर दलवीर सिंह के छोटे पौत्र विजय सिंह उर्फ पप्पू के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के साथ बरौली की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। गुरुवार को लखनऊ में उन्होंने सपा की सदस्यता ली। इससे पहले वह कई महीनों से सपा नेताओं के संपर्क में बताए जा रहे थे।

सपा जिलाध्यक्ष लक्ष्मी धनगर के मुताबिक, विजय सिंह दो दिन पहले उनके आवास पर पहुंचे थे, जहां पार्टी में शामिल होने को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बाद लखनऊ में उन्होंने सपा की सदस्यता ग्रहण की।

विजय सिंह और उनके बड़े भाई अजय सिंह लंबे समय से बरौली क्षेत्र में सक्रिय हैं। अजय सिंह एएमयू छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ चुके हैं। 2022 में उन्होंने बरौली से भाजपा टिकट के लिए दावेदारी की थी, लेकिन भाजपा ने जयवीर सिंह को उम्मीदवार बनाया था।

क्या बरौली से चुनाव लड़ेंगे विजय सिंह?

सपा में शामिल होने के बाद विजय सिंह के बरौली विधानसभा सीट से संभावित उम्मीदवार होने की चर्चा तेज हुई है। हालांकि, अभी पार्टी की ओर से उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है।

2022 में बरौली सीट सपा-रालोद गठबंधन में रालोद के खाते में थी। प्रमोद गौड़ गठबंधन प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे थे। आगामी विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा क्या रहता है, यह तय होने के बाद ही बरौली में संभावित दावेदारों की तस्वीर ज्यादा साफ होगी।

विरासत का फायदा, जमीन पर खुद को साबित करने की चुनौती

विजय सिंह को राजनीति विरासत में मिली है। उनके दादा दलवीर सिंह चार बार विधायक रहने के साथ उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहे। परिवार के अन्य सदस्य भी चंडौस क्षेत्र में ब्लॉक प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

यह राजनीतिक पृष्ठभूमि विजय सिंह को क्षेत्र में पहचान और संगठनात्मक संपर्क का आधार देती है। दूसरी ओर, बरौली में अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ मजबूत करना उनके लिए महत्वपूर्ण होगा।

गठबंधन की स्थिति, पार्टी का स्थानीय संगठन और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण उनकी आगे की राह को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा गभाना टाउन एरिया चुनाव में मिली हार के बाद अब सपा के साथ उनकी नई राजनीतिक पारी किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर भी नजर रहेगी।

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