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निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये गलती, नहीं मिलेगा व्रत का पूरा फल

निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण और कठिन व्रतों में से एक मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत करने से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। लेकिन धार्मिक…

24GhanteOnline
June 24, 2026
2 min read

निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण और कठिन व्रतों में से एक मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत करने से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। लेकिन धार्मिक ग्रंथों में कुछ ऐसे कार्य बताए गए हैं, जिन्हें इस दिन करने से व्रत का फल कम हो सकता है।

भूलकर भी न करें ये गलती

धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) के दिन क्रोध करना, किसी का अपमान करना या कटु वचन बोलना सबसे बड़ी भूल मानी जाती है। कहा जाता है कि व्रत केवल भोजन और जल का त्याग नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता भी जरूरी है। इसलिए इस दिन संयमित व्यवहार रखना चाहिए।

इन बातों का भी रखें ध्यान

- किसी भी व्यक्ति का अपमान न करें।
- झूठ बोलने और विवाद से बचें।
- तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें।
- तुलसी के पत्ते बिना आवश्यकता न तोड़ें।
- जरूरतमंद को दान करने से पीछे न हटें।
-भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा श्रद्धा से करें।

क्या करें?

निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) के दिन भगवान विष्णु का पूजन करें, विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करें तथा तुलसी की पूजा अवश्य करें। सामर्थ्य अनुसार जल, फल, वस्त्र और अन्न का दान करना भी शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा, संयम और सद्व्यवहार के साथ किया गया निर्जला एकादशी व्रत व्यक्ति को विशेष पुण्य और भगवान विष्णु की कृपा प्रदान करता है।

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