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पूजा घर के ऊपर-नीचे भूलकर भी न बनाएं ये जगहें, जानें वास्तु नियम

घर बनाते समय हर कमरे की जगह उसकी जरूरत के हिसाब से तय की जाती है, लेकिन पूजा घर की दिशा और स्थान को लेकर लोग खास सावधानी बरतते हैं। वास्तु शास्त्र में पूजा स्थल को घर का शांत और पवित्र स्थान माना गया है। ऐसे में सवाल…

24GhanteOnline
September 18, 2026
3 min read
पूजा घर के ऊपर-नीचे भूलकर भी न बनाएं ये जगहें, जानें वास्तु नियम

घर बनाते समय हर कमरे की जगह उसकी जरूरत के हिसाब से तय की जाती है, लेकिन पूजा घर की दिशा और स्थान को लेकर लोग खास सावधानी बरतते हैं। वास्तु शास्त्र में पूजा स्थल को घर का शांत और पवित्र स्थान माना गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि पूजा घर के ठीक ऊपर या नीचे क्या होना चाहिए और किन जगहों से बचना चाहिए?

पूजा घर के ऊपर क्या होना चाहिए?

वास्तु मान्यताओं के अनुसार, पूजा घर के ठीक ऊपर भारी सामान रखने या ऐसी जगह बनाने से बचना चाहिए जहां लगातार लोगों की आवाजाही रहती हो। पूजा स्थल के आसपास का वातावरण शांत, साफ और व्यवस्थित रखना बेहतर माना जाता है।

पूजा घर के ऊपर बेडरूम बनाना कैसा माना जाता है?

वास्तु मान्यताओं में पूजा घर के ठीक ऊपर बेडरूम बनाने को सामान्यतः उचित नहीं माना जाता, खासकर तब जब पूजा स्थल के ठीक ऊपर बेड, अलमारी या भारी फर्नीचर रखा हो। हालांकि, अगर घर की संरचना के कारण ऐसा करना जरूरी हो, तो वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेने की मान्यता है।

पूजा घर के ऊपर-नीचे बाथरूम क्यों नहीं?

वास्तु के अनुसार पूजा घर के ठीक ऊपर या नीचे बाथरूम और टॉयलेट बनाने से बचने की सलाह दी जाती है। इसी तरह पूजा स्थल के नीचे कबाड़, गंदगी या ऐसी जगह भी नहीं होनी चाहिए जिसकी नियमित साफ-सफाई न होती हो।

अगर आप नया घर बनवा रहे हैं, तो नक्शा तैयार करते समय ही ध्यान रखें कि पूजा घर की सीधी लाइन में ऊपर या नीचे बाथरूम या टॉयलेट न आए।

पूजा घर के लिए कौन सी दिशा मानी जाती है शुभ?

वास्तु शास्त्र की मान्यताओं में उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को पूजा घर के लिए विशेष माना जाता है। इसके अलावा पूर्व और उत्तर दिशा को भी कई वास्तु परंपराओं में पूजा स्थल के लिए उपयुक्त बताया गया है।

नक्शा बनाते समय ही तय करें पूजा घर की जगह

पूजा घर को बाद में घर में किसी खाली जगह पर बनाने के बजाय शुरुआत में ही उसकी जगह तय करना बेहतर रहता है। इससे उसके ऊपर और नीचे बनने वाले कमरों की योजना भी उसी अनुसार बनाई जा सकती है।

सबसे जरूरी बात यह है कि पूजा स्थल ऐसी जगह हो जहां परिवार के सदस्य आसानी से पूजा कर सकें और नियमित रूप से साफ-सफाई रख सकें। वास्तु से जुड़ी ये बातें धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नियम नहीं हैं।

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