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रामनवमी पर इस विधि से करें कन्या पूजन, नोट करें शुभ मुहूर्त

आज चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन है। नवमी तिथि को मां दुर्गा के नौवें स्वरूप में सिद्धिदात्रि की पूजा का विधान हैं। साथ ही इस दिन व्रत करने वाले कन्या पूजन (Kanya Pujan) करते हैं। कहते हैं कन्या पूजन करने से मां भगवती…

24GhanteOnline
April 6, 2025
2 min read

आज चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन है। नवमी तिथि को मां दुर्गा के नौवें स्वरूप में सिद्धिदात्रि की पूजा का विधान हैं। साथ ही इस दिन व्रत करने वाले कन्या पूजन (Kanya Pujan) करते हैं। कहते हैं कन्या पूजन करने से मां भगवती प्रसन्न होती हैं और भक्तों आशीर्वाद प्रदान करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शुभ मुहूर्त और पूरे विधि-विधान से कन्या पूजन करना शुभ होता है। ऐसा करने से मां आदिशक्ति की कृपा से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। साथ ही तमाम कष्टों से मुक्ति मिलती है।

महानवमी कन्या पूजन (Kanya Pujan) का शुभ मुहूर्त


पंचांग के अनुसार, महानवमी तिथि का शुरुआत हो जाएगी जो कि 6 अप्रैल को शाम 7 बजकर 22 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। ऐसे में महानवमी 6 अप्रैल को है। वहीं कन्या पूजन के लिए शुभ अभिजित मुहूर्त सुबह11बजकर 58 से लेकर दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कन्या पूजन कर सकते हैं।

कन्या पूजन (Kanya Pujan) की सामग्री


कन्याओं का पैर धोने के लिए साफ जल, और कपड़ा, बैठना के लिए आसन, गाय के गोबर से बने उपले, पूजा की थाली, घी का दीपक, रोली, महावर, कलावा ,चावल, फूल, चुन्नी, फल, मिठाई, हलवा-पूरी और चना, भेंट और उपहार।

कन्या पूजन (Kanya Pujan) मंत्र


स्तोत्र मंत्र:

या देवी सर्वभूतेषु कन्या रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ऊं श्री दुं दुर्गायै नम: ।।

कन्या पूजन (Kanya Pujan) विधि


महा नवमी के दिन कन्या पूजन (Kanya Pujan) करने के लिए सुबह जल्दी उठकर घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। फिर स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान गणेश और मां सिद्धिदात्रि की पूजा करें। कन्या पूजन के लिए 1 से 10 साल तक की नौ कन्याओं को और एक बालक को आमंत्रित करें।

माता के जयकारे के साथ कन्याओं का स्वगत करें। उसके बाद सभी कन्याओं का पैर खुद अपने हाथों से धुलें और पोछें। इसके बाद उनके माथे पर कुमकुम और अक्षत का टीका लगाएं।

फिर उनके हाथ में मौली या कलावा बाधें। एक थाली में घी का दीपक जलाकर सभी कन्याओं की आरती उतारें। आरती के बाद सभी कन्याओं हलवा-पूरी, चना का भोग लगाएं।

भोजन के बात अपनी सामर्थ अनुसार कन्याओं को कुछ न कुछ भेंट जरूर दें। आखिरी में कन्याओं का पैर छूकर उनका आशीर्वाद जरूर प्राप्त करें।

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