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योगी सरकार का बड़ा फैसला, जिला पंचायत अध्यक्षों को मिली प्रशासक की जिम्मेदारी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने जिला पंचायतों (District Panchayat President) के कामकाज में किसी तरह का प्रशासनिक खालीपन न रहे, इसके लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने सभी 75 जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त कर दिया…

24GhanteOnline
July 11, 2026
3 min read
योगी सरकार का बड़ा फैसला, जिला पंचायत अध्यक्षों को मिली प्रशासक की जिम्मेदारी

लखनऊ :  उत्तर प्रदेश सरकार ने जिला पंचायतों (District Panchayat President)  के कामकाज में किसी तरह का प्रशासनिक खालीपन न रहे, इसके लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने सभी 75 जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त कर दिया है। इस संबंध में पंचायती राज विभाग ने शुक्रवार देर रात आदेश जारी कर दिया। अब नई व्यवस्था लागू होने तक निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष ही प्रशासक के रूप में अपने-अपने जिलों की पंचायतों का संचालन करेंगे।

दरअसल, वर्ष 2021 में निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों का पांच वर्षीय कार्यकाल शनिवार को समाप्त हो रहा है। पहली बैठक 12 जुलाई 2021 को हुई थी, जिसके आधार पर उनका कार्यकाल पूरा माना गया है। ऐसे में नई पंचायत व्यवस्था बनने तक सरकार ने मौजूदा अध्यक्षों को ही जिम्मेदारी सौंपने का फैसला लिया है।

ग्राम प्रधानों के बाद अब जिला पंचायतों में भी लागू हुआ नया मॉडल

प्रदेश सरकार इससे पहले ग्राम पंचायतों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू कर चुकी है। 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद पहली बार निवर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक बनाया गया था। पहले यह जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों को दी जाती थी, लेकिन सरकार ने इस बार जनप्रतिनिधियों को ही जिम्मेदारी सौंपने का फैसला लिया है।

ब्लॉक प्रमुखों के लिए भी बन रही यही रणनीति

अब सरकार की नजर ब्लॉक प्रमुखों पर है। उनका कार्यकाल 19 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, उनके लिए भी यही व्यवस्था लागू की जाएगी और 18 जुलाई के आसपास शासन इस संबंध में आदेश जारी कर सकता है।

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा कानूनी आधार

हालांकि, निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का फैसला अब न्यायिक जांच के दायरे में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि यह व्यवस्था किस कानूनी प्रावधान के तहत लागू की गई और यह संविधान के अनुरूप कैसे है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने सरकार को समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और उसकी कार्रवाई का पूरा ब्योरा भी पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 12(3-ए) की संवैधानिक वैधता पर विचार किया जाना जरूरी है।

कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2000 में प्रेम लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में इसी तरह के प्रावधान को संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के के विपरीत मानते हुए असंवैधानिक करार दिया गया था। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अपील का निस्तारण करते हुए इस कानूनी प्रश्न को खुला छोड़ दिया था। अब इस मामले पर हाईकोर्ट विस्तृत सुनवाई करेगा, जिस पर सरकार की नई व्यवस्था का भविष्य भी काफी हद तक निर्भर करेगा।

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