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विकास और संरक्षण विरोधी नहीं, दोनों साथ चल सकते हैं: उपराष्ट्रपति

देहरादून। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन (CP Radhakrishnan) ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों को संतुलित करते हुए आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु…

24GhanteOnline
August 19, 2026
3 min read
विकास और संरक्षण विरोधी नहीं, दोनों साथ चल सकते हैं: उपराष्ट्रपति

देहरादून। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन (CP Radhakrishnan) ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों को संतुलित करते हुए आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों से संरक्षण और विकास, पारिस्थितिक सुरक्षा और आजीविका तथा वर्तमान जरूरतों और भावी पीढ़ियों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति बुधवार को देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में भारतीय वन सेवा के 2025-27 बैच के परिवीक्षार्थियों और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रॉयल भूटान वन सेवा के अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।

वनों और जैव विविधता की सुरक्षा में IFS की अहम भूमिका

सीपी राधाकृष्णन ने प्रशिक्षु अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि विकसित भारत@2047 की दिशा में आगे बढ़ते हुए आने वाले दशकों में उन्हें देश के वनों, वन्यजीवों, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी होगी।

उन्होंने कहा कि देश की पारिस्थितिक सुरक्षा मजबूत करने और वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने में भारतीय वन सेवा की भूमिका महत्वपूर्ण है।

आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक ज्ञान का समन्वय जरूरी

उपराष्ट्रपति ने वानिकी में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए अधिकारियों से रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा आधारित प्रणालियों का प्रभावी उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी दक्षता के साथ क्षेत्रीय अनुभव, विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता और लोगों के प्रति संवेदनशीलता भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारत के सतत भविष्य के निर्माण के लिए आधुनिक वैज्ञानिक वानिकी और देश के सभ्यतागत ज्ञान को एक-दूसरे का पूरक बनाना होगा। साथ ही पीढ़ियों से वन क्षेत्रों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के साथ सामंजस्य में रह रहे समुदायों के पारंपरिक ज्ञान का सम्मान किया जाना चाहिए।

‘सत्यनिष्ठा से कोई समझौता नहीं’

लोक सेवा में ईमानदारी और संवैधानिक मूल्यों को महत्वपूर्ण बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सत्यनिष्ठा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने अधिकारियों से कठिन परिस्थितियों में संविधान, कानून, विज्ञान और व्यापक जनहित को निर्णय का आधार बनाने की अपील की।

उन्होंने व्यक्तिगत उत्कृष्टता के बजाय टीम की उत्कृष्टता पर जोर देते हुए कहा कि निरंतर सामूहिक प्रयास ही मजबूत संस्थानों और राष्ट्रों का निर्माण करते हैं।

वन सेवा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी उत्साहजनक

सीपी राधाकृष्णन ने वन सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी उत्साहजनक बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान बैच में लगभग 17 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी का प्रमाण है।

उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे अपने करियर की सफलता का आकलन केवल पद और उपलब्धियों से न करें। बल्कि यह देखें कि उनके कार्यकाल में कितने वन पुनर्स्थापित हुए, कितने वन्यजीव संरक्षित हुए, कितने समुदायों का विश्वास अर्जित हुआ और भावी पीढ़ियों के लिए कैसी विरासत छोड़ी गई।

उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए ‘राष्ट्र प्रथम’ का संदेश दिया।

कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, आईजीएनएफए निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद, कोर्स निदेशक अजीता लोंगजाम समेत अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

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