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अमीरों की कर्मों की कीमत गरीबों को चुकानी पड़ रही है... दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण पर बोले CJI

दिल्ली-NCR के गंभीर वायु प्रदूषण से जुड़े एक मामले को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने मेंशन किया गया है। एमिकस क्यूरी अपराजिता सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकारें तब तक कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं…

24GhanteOnline
December 15, 2025
2 min read

दिल्ली-NCR के गंभीर वायु प्रदूषण से जुड़े एक मामले को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने मेंशन किया गया है। एमिकस क्यूरी अपराजिता सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकारें तब तक कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं करतीं, जब तक कि कोर्ट सख्ती से उन्हें लागू करने का आदेश न दे।

इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कोर्ट को बताया कि प्रदूषण के स्तर के बावजूद कुछ स्कूलों ने अपने खेल प्रोग्राम जारी रखे हुए हैं। इससे पता चलता है कि प्रोटोकॉल और निर्देश मौजूद हैं, लेकिन जमीन पर उनको मजबूती से लागू नहीं किया जा रहा है।

जिसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने कहा कि हम समस्या को जानते हैं और आइए हम ऐसे आदेश पारित करें जिनका पालन किया जा सके। कुछ निर्देश ऐसे हैं, जिन्हें जबरदस्ती लागू नहीं किया जा सकता। इन शहरी महानगरों में लोगों की अपनी जीवनशैली है, लेकिन गरीब मजदूर सबसे ज्यादा पीड़ित हैं। CJI ने सभी पक्षकारों से कहा कि एक बार एमिकस नियुक्त हो जाने पर, अपने सुझाव आदि एमाइकस को भेजें न कि प्रेस और मीडिया को। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह मामला बुधवार को तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष आएगा और इस पर सुनवाई होगी।

सिर्फ प्रभावी आदेश ही पारित करेंगे- CJI Surya Kant


CJI Surya Kant ने एक महत्वपूर्ण बात मानते हुए कहा कि हम सिर्फ प्रभावी आदेश ही पारित करेंगे, कुछ निर्देश ऐसे हैं जिन्हें लागू नहीं किया जा सकता। CJI ने तर्क दिया कि लाखों लोगों की जीवनशैली और आजीविका को नजरअंदाज करके आदेश नहीं दिए जा सकते। उदाहरण के लिए वाहन चलाना बंद करना या सभी निर्माण कार्य रोकना व्यावहारिक नहीं हो सकता।

अमीरों की कर्मों की कीमत गरीबों को चुकानी पड़ रही है- CJI Surya Kant


CJI Surya Kant और एमिकस दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव गरीब मजदूर वर्ग पर पड़ता है, जो बाहर खुले में काम करते हैं और अक्सर महंगे सुरक्षा उपकरण (जैसे एयर प्यूरीफायर या एन95 मास्क) नहीं खरीद सकते।

CJI Surya Kant ने कहा कि अमीर वर्ग अपनी जीवनशैली (जैसे, कारों का उपयोग, एसी का इस्तेमाल) बदलने को तैयार नहीं है, जिससे प्रदूषण होता है, लेकिन इसकी कीमत गरीबों को चुकानी पड़ती है। यह पर्यावरणीय न्याय का एक मुद्दा है।

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