2026 में नया फोन खरीदना होगा महंगा, 6.9% तक उछलेंगी कीमतें
अगर आप अगले एक-दो साल में पुराने से नए फोन (Smartphone) में अपग्रेड होने का प्लान कर रहे हैं तो अभी 2025 में ही नया फोन खरीदने में फायदा है, क्योंकि हाल ही में इस बात की जानकारी सामने आई है कि अगले साल स्मार्टफोन की…
अगर आप अगले एक-दो साल में पुराने से नए फोन (Smartphone) में अपग्रेड होने का प्लान कर रहे हैं तो अभी 2025 में ही नया फोन खरीदने में फायदा है, क्योंकि हाल ही में इस बात की जानकारी सामने आई है कि अगले साल स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ सकती है और इसके पीछे की वजह Artificial Intelligence है.
Counterpoint की नई रिसर्च के मुताबिक, AI इंफ्रास्ट्रक्चर की जबरदस्त मांग का असर कंज्यूमर्स तक पहुंच रहा है. जैसे-जैसे डेटा सेंटर तेजी से जरूरी पार्ट्स इस्तेमाल कर रहे हैं, स्मार्टफोन बनाने वालों पर दबाव पड़ रहा है, प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ रही है और कीमतें लगभग पक्का ऊपर जा रही हैं. प्रॉब्लम की जड़ में एक छोटा लेकिन जरूरी हिस्सा है: मेमोरी.
इतनी बढ़ेगी कीमतें
काउंटरपॉइंट को उम्मीद है कि 2026 में दुनिया भर में स्मार्टफोन (Smartphone) की औसत सेलिंग प्राइस में 6.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, जो पहले के अनुमान से कहीं ज्यादा बड़ी बढ़ोतरी है. हमेशा की तरह, इस बढ़ती लागत का सीधा असर कस्टमर्स पर पड़ेगा. सभी ब्रैंड्स पर इसका असर एक जैसा नहीं है, Apple और Samsung जैसी इंडस्ट्री की बड़ी कंपनियां इस मुश्किल का सामना करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं. छोटे मैन्युफैक्चरर्स, खासकर जो मिड-रेंज और बजट डिवाइस पर फोकस करते हैं, उनके लिए मुश्किलें ज्यादा है.
नेक्स्ट जेनरेशन स्मार्टफोन्स (Smartphone) और एडवांस्ड AI सर्वर एक ही तरह की मेमोरी चिप्स, खासकर DRAM पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. ये चिप्स मुश्किल कामों को संभालने के लिए बहुत जरूरी हैं, चाहे वह सर्वर रैक में एक पावरफुल AI मॉडल चलाना हो या ऐप्स, गेम्स और फोटो के बीच स्विच करते समय आपके फोन को रिस्पॉन्सिव रखना हो.
दिक्कत यह है कि AI डेटा सेंटर, खासकर जो एडवांस्ड Nvidia-बेस्ड सिस्टम पर चलते हैं, मेमोरी सप्लायर्स के लिए स्मार्टफोन की तुलना में कहीं ज्यादा फायदेमंद हैं. जैसे-जैसे AI में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बढ़ रहा है, मैन्युफैक्चरर्स इन ज्यादा मार्जिन वाले कस्टमर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए कम चिप्स उपलब्ध हो पा रही हैं. इसका नतीजा यह है कि सप्लाई कम हो रही है और कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं.
2026 तक स्थिति हो सकती है ज्यादा खराब
काउंटरपॉइंट एनालिस्ट्स चेतावनी देते हैं कि यह असंतुलन टेम्पररी नहीं है. असल में 2026 तक स्थिति और खराब हो सकती है. उम्मीद है कि उस साल के पहले छह महीनों में मेमोरी की कीमतें 40 फीसदी तक बढ़ जाएंगी, जिससे स्मार्टफोन प्रोडक्शन कॉस्ट पर और भी ज्यादा दबाव पड़ेगा.
यह बढ़ोतरी पहले से ही “बिल ऑफ़ मटीरियल्स, या BoM” में दिख रही है, जो एक फोन बनाने के लिए ज़रूरी कंपोनेंट्स की कुल कीमत होती है. $200 (लगभग 18064 रुपए) से कम कीमत वाले बजट डिवाइस सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जिनकी प्रोडक्शन कॉस्ट सिर्फ एक साल में 20 फीसदी से 30 फीसदी तक बढ़ गई है. मिड-रेंज और प्रीमियम फोन भी इससे बचे नहीं हैं, इन स्मार्टफोन्स की भी प्रोडक्शन कॉस्ट 10 से 15 फीसदी तक बढ़ी है.
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