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300 सालों के बाद महाशिवरात्रि पर बन रहा है शुभ संयोग, जानें कैसे करें साधना

सनातन धर्म में महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का एक विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं। इस बार महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा…

24GhanteOnline
February 15, 2026
3 min read

सनातन धर्म में महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का एक विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं। इस बार महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा। यह एक मात्र पर्व नहीं है बल्कि ये हमें याद दिलाता है कि घोर अंधकार की रात में शिव दर्शन प्रकाश के रूप में प्रकट होता है। ऐसा माना जाता है कि इस रात शिव लिंगम के रूप में समस्त सृष्टि में विराजमान होते हैं। शिव का अर्थ विनाश नहीं है। इसका अर्थ है अहंकार का नाश, अज्ञान का निवारण। मौन में ध्यान, जागृति में ज्ञान, घृणा से मुक्ति।

महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का शुभ समय 15 से 16 फरवरी तक है। आइए इस दिन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों पर एक नजर डालते हैं।

महाशिवरात्रि (Mahashivratri) पर शुभ योगों का संयोजन


इस वर्ष शिवरात्रि में दिव्य और ज्योतिषीय शक्तियों का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। ऐसा माना जाता है कि यह शुभ योगों का ऐसा संयोजन है जो लगभग 300 सालों में एक बार ही होता है। ये विशेष राज योग और शुभ योग इस पर्व को और भी अधिक शुभ बनाते हैं।

11 शुभ योगों की विशेषताएं


- शिव योग- शिव के लिए सबसे शुभ योग, सुबह 5.45 बजे से पूरे दिन चलता है।
- सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 6.43 बजे से 9.37 बजे तक सभी कार्यों में सफलता।
- प्रीति योग- प्रेम और मित्रता की शक्ति, सुबह 11.19 बजे से 11.23 बजे तक।
- आयुष्मान योग- दीर्घायु, दोपहर 12.17 बजे से रात 1.54 बजे तक।
- सौभाग्य योग- शाम 5.07 बजे से शाम 5.53 बजे तक।
- शोभना योग- सौंदर्य, विकास, शाम 7.47 बजे से रात 8.34 बजे तक।
- सत्य योग- साधना में सफलता, रात 8.54 बजे से रात 10.02 बजे तक।
- शुक्ल योग- शुद्ध विचार, रात 10.42 बजे से रात 11.58 बजे तक।
- ध्रुव योग- स्थिरता, सुबह 2.57 बजे से अगली सुबह 5.53 बजे तक।
- वैद्यपदम
- वारियान

महाशिवरात्रि पर पांच दुर्लभ राजयोग


बुद्धादित्य राज योग -बुद्धि, आदर और सम्मान की एक अद्भुत अवस्था।
लक्ष्मी-नारायण योग- आर्थिक शक्ति, धन और सफलता
शुक्रदित्य योग- सुख, कला और सौंदर्य

साशा राज योग कुछ लाभ, स्थिरता


चतुर्ग्राही योग- एक दुर्लभ स्थिति जिसमें सूर्य, बुध, शुक्र और राहु एक साथ आते हैं।
इन पांच राज योगों के लाभ आम दिनों में शायद ही देखने को मिलते हैं। ये दुर्लभ योग धन, समृद्धि, विलासिता और व्यापार में भारी लाभ लाते हैं।

महाशिवरात्रि (Mahashivratri) पर आराधना का समय


अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक।

शाम की पूजा का समय: राहु काल के बाद से शाम 7:28 बजे तक।

निशीत काल (पूजा का सबसे शुभ समय): दोपहर 12:09 बजे से रात 1:00 बजे तक।

राहु काल: 15 फरवरी, शाम 4:47 से 6:11 बजे तक। ज्योतिष के अनुसार, इस समय पूजा-अर्चना शुरू नहीं करनी चाहिए।

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