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यूपी में आकाश आनंद की वापसी, तेवर वही लेकिन अंदाज बदला

हाथरस: शुरुआती सियासी झटकों और करीब दो साल की यूपी से दूरी के बाद बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद (Akash Anand) एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय नजर आए। सोमवार को हाथरस के सादाबाद में जनसभा के जरिए उनकी…

24GhanteOnline
August 11, 2026
3 min read
यूपी में आकाश आनंद की वापसी, तेवर वही लेकिन अंदाज बदला

हाथरस: शुरुआती सियासी झटकों और करीब दो साल की यूपी से दूरी के बाद बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद (Akash Anand) एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय नजर आए। सोमवार को हाथरस के सादाबाद में जनसभा के जरिए उनकी यूपी में दोबारा लॉन्चिंग हुई। भाषण में बसपा सुप्रीमो मायावती की नसीहतों का असर दिखा, लेकिन युवाओं के बीच आकाश का आकर्षण और उनके तेवर पहले जैसे ही नजर आए।

भाजपा-सपा के साथ कांग्रेस पर भी निशाना

सादाबाद की जनसभा में आकाश आनंद ने भाजपा और सपा के साथ कांग्रेस को भी निशाने पर लिया। युवाओं के प्रदर्शन का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने विपक्षी दलों पर सवाल खड़े किए।

हालांकि, इस बार उनके भाषण में कोई ऐसा विवादित बयान सामने नहीं आया, जो उनके लिए राजनीतिक मुश्किल खड़ी करे। इससे संकेत मिला कि पिछली गलतियों से सबक लेते हुए आकाश अब ज्यादा संभलकर सियासत करने की कोशिश कर रहे हैं।

पारिवारिक उठापटक का भी नहीं दिखा असर

हाल में बसपा में हुई उठापटक के बीच आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को मायावती ने दोबारा पार्टी से बाहर कर दिया था। इसके बाद पारिवारिक मतभेदों को लेकर भी चर्चा तेज हुई।

इन परिस्थितियों के बावजूद आकाश ने सादाबाद की सभा में पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखी। उनके तेवर में कोई बड़ी कमी नहीं दिखी, लेकिन भाषण के अंदाज में पहले के मुकाबले ज्यादा राजनीतिक संयम नजर आया।

विवादित भाषण से यूपी से हुए थे दूर

आकाश आनंद का सियासी सफर 2019 में सहारनपुर के देवबंद की रैली से शुरू हुआ था। 2023 में मायावती ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित कर कई राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी थी।

लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान सीतापुर में दिए गए एक विवादित भाषण के बाद मायावती ने उन्हें अपरिपक्व बताते हुए कई जिम्मेदारियों से हटा दिया। उन्हें पार्टी के उत्तराधिकारी पद से भी हटाया गया और यूपी की राजनीति से दूरी बना ली।

वापसी के बाद भी नहीं मिली आसान राह

चुनाव के बाद आकाश की पार्टी में वापसी हुई, लेकिन उन्हें यूपी और उत्तराखंड से दूर रखा गया। 2025 में उन्हें और अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर कर दिया गया। करीब चार महीने बाद माफी मांगने पर दोनों की बसपा में वापसी हुई।

इसके बाद आकाश को हरियाणा, दिल्ली और बिहार समेत कई राज्यों के चुनावों में जिम्मेदारी दी गई, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। अब करीब दो साल बाद सादाबाद की जनसभा के जरिए उनकी यूपी में वापसी हुई है।

आकाश आनंद की यह वापसी कितनी लंबी और प्रभावी होगी, यह आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल उनकी कोशिश यही नजर आ रही है कि तेवर बरकरार रखते हुए सियासी परिपक्वता की नई छवि बनाई जाए।

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