तेलंगाना राज्यसभा उपचुनाव: कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने दाखिल किया नामांकन
हैदराबाद। अभिषेक मनु सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी ने गुरुवार को तेलंगाना से राज्यसभा की दो सीटों के लिए कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। 16 मार्च को होने वाले चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने…

हैदराबाद। अभिषेक मनु सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी ने गुरुवार को तेलंगाना से राज्यसभा की दो सीटों के लिए कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया।
16 मार्च को होने वाले चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन अभिषेक सिंघवी और रेड्डी ने तेलंगाना विधानसभा में रिटर्निंग ऑफिसर उपेंद्र रेड्डी के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। विधायी कार्य मंत्री डी. श्रीधर बाबू के नेतृत्व में यह प्रक्रिया संपन्न हुई। इस अवसर पर तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष महेश कुमार गौड़, मंत्री, कांग्रेस सांसद, विधायक और अन्य नेता उपस्थित थे।
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने तेलंगाना से सिंघवी को दूसरे कार्यकाल के लिए उम्मीदवार बनाया है जबकि नरेंद्र रेड्डी पहली बार संसद के उच्च सदन के लिए चुनाव लड़ेंगे।
नरेंद्र रेड्डी तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के करीबी सहयोगी और सलाहकार हैं। पार्टी नेतृत्व ने कई वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी करते हुए उन्हें दूसरे उम्मीदवार के रूप में नामित किया।
सुप्रीम कोर्ट के वकील सिंघवी को दूसरे कार्यकाल के लिए चुना जाना पहले से ही तय था, क्योंकि उनकी कानूनी दक्षता और संसद में उनकी प्रभावशाली उपस्थिति को राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अभिषेक सिंघवी और के.आर. सुरेश रेड्डी का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, जिसके चलते चुनाव हो रहा है। सुरेश रेड्डी वर्तमान में बीआरएस संसदीय दल के नेता हैं।
चूंकि भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने चुनाव लड़ने की कोई योजना घोषित नहीं की है, इसलिए सिंघवी और नरेंद्र रेड्डी के सर्वसम्मति से निर्वाचित होने की संभावना है।
गौरतलब है कि तेलंगाना विधानसभा में कांग्रेस के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त बहुमत है। 119 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 66 विधायक हैं, जबकि उसकी सहयोगी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) का एक विधायक है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के सात विधायक हैं। आधिकारिक तौर पर बीआरएस के 37 विधायक हैं, लेकिन उनमें से 10 ने 2024 में कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया था। वहीं, भाजपा के आठ विधायक हैं।
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