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अब्बास अंसारी का बड़ा सियासी यू-टर्न, 'सपा' के रंग में रंगे आए नजर

पूर्वांचल की सियासत के केंद्र रहे दिवंगत बाहुबली मुख्तार अंसारी (Abbas Ansari ) के बेटे और मऊ सदर सीट से विधायक अब्बास अंसारी कानूनी कानूनी राहत मिलने और जेल से रिहा होने के बाद करीब चार साल बाद अपने विधानसभा क्षेत्र…

24GhanteOnline
May 22, 2026
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पूर्वांचल की सियासत के केंद्र रहे दिवंगत बाहुबली मुख्तार अंसारी (Abbas Ansari ) के बेटे और मऊ सदर सीट से विधायक अब्बास अंसारी कानूनी कानूनी राहत मिलने और जेल से रिहा होने के बाद करीब चार साल बाद अपने विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हुए हैं। मऊ पहुंचते ही अब्बास अंसारी एक अलग ही राजनीतिक तेवर और रंग में नजर आए। उन्होंने मऊ के इटौरा ग्राम सभा में 25 लाख रुपये की लागत से बनने वाली इंटरलॉकिंग सड़क का उद्घाटन किया और कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर जनता से सीधा संवाद किया।

इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उनके राजनीतिक स्टैंड को लेकर रही। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के सिंबल पर चुनाव जीतने के बावजूद अब्बास अंसारी ने अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर से दूरी बना ली है और खुलेआम समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव को अपना नेता बता रहे हैं।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में अपने पिता मुख्तार अंसारी की पारंपरिक मऊ सदर सीट से जीत हासिल करने के बाद अब्बास अंसारी (Abbas Ansari ) पर कई एफआईआर दर्ज हुईं, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। कानूनी शिकंजे के चलते एक वक्त उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द होने की कगार पर थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद उनकी विधायकी बच गई। करीब सवा चार साल बाद मऊ में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए भावुक अंदाज में अब्बास अंसारी ने जनता को बताया कि वे एक इंटरनेशनल खिलाड़ी (शूटर) थे, लेकिन परिस्थितियों और अपने पिता के जेल जाने के बाद उन्हें राजनीति में कदम रखना पड़ा। उन्होंने जिला प्रशासन को भी कड़ा संदेश देते हुए कहा कि न्यायपालिका पर विश्वास और जनता के आशीर्वाद से वे बाहर आए हैं और अब प्रशासन उनके और मऊ की जनता के बीच दूरी बनाने की कोशिश न करे।

राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा हलचल इस बात को लेकर है कि अब्बास अंसारी (Abbas Ansari ) ने औपचारिक रूप से सपा की सदस्यता लिए बिना ही 'साइकिल' का झंडा उठा लिया है। मऊ दौरे के दौरान मंच पर लगे सारे पोस्टर समाजवादी पार्टी के थे और उनके साथ सपा के जिला अध्यक्ष दूधनाथ यादव सहित तमाम पार्टी कार्यकर्ता मुस्तैद दिखे। अब्बास अंसारी बार-बार अखिलेश यादव को "हमारे अध्यक्ष" कहकर संबोधित कर रहे थे। जब उनसे आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर लड़ने को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही नपे-तुले अंदाज में कहा कि अभी 2027 का चुनाव बहुत दूर है और फिलहाल उनका एकमात्र लक्ष्य अपनी विधायक निधि से जनता के रुके हुए विकास कार्यों को पूरा करना है। उन्होंने आगे जोड़ा कि टिकट देने का फैसला केवल सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ही कर सकते हैं।

रणनीतिक रूप से अब्बास अंसारी (Abbas Ansari ) अभी आधिकारिक तौर पर समाजवादी पार्टी में इसलिए शामिल नहीं हो रहे हैं क्योंकि दलबदल कानून (Anti-Defection Law) के तहत उनकी विधायकी रद्द हो सकती है। चूंकि सुभासपा ने उन्हें अभी तक दल से निष्कासित नहीं किया है, इसलिए विधायक बने रहने के लिए वे सुभासपा के तकनीकी दायरे में रहकर ही सपा के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। मऊ की जनता से अपने पारिवारिक और ऐतिहासिक रिश्तों को जोड़ते हुए अब्बास अंसारी ने मंच से कहा कि उनके परिवार ने अपनी निजी जमीन देकर इस क्षेत्र में 18 गांव बसाए हैं। उन्होंने देश की आजादी में अपने परिवार के योगदान को याद करते हुए स्वतंत्रता सेनानी डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी और देश के लिए शहीद होने वाले ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का जिक्र किया। उन्होंने मऊ की आवाम को भरोसा दिलाया कि जब तक उनके शरीर में खून की आखिरी बूंद है, वे यहां के लोगों के मान-सम्मान की हिफाजत करते रहेंगे।

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