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योगी सरकार की नीतियों का असर, श्वेतक्रांति की अग्रदूत बनीं पौने चार लाख महिलाएं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गांवों में पौने चार लाख महिलाएं श्वेतक्रांति (White Revolution) की नई ताकत बनकर उभरी हैं। योगी सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन और डेयरी मॉडल से जुड़कर ये महिलाएं अब केवल पशुपालन तक सीमित नहीं हैं,…

24GhanteOnline
August 17, 2026
4 min read
योगी सरकार की नीतियों का असर, श्वेतक्रांति की अग्रदूत बनीं पौने चार लाख महिलाएं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गांवों में पौने चार लाख महिलाएं श्वेतक्रांति (White Revolution) की नई ताकत बनकर उभरी हैं। योगी सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन और डेयरी मॉडल से जुड़कर ये महिलाएं अब केवल पशुपालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दूध के संग्रह से लेकर उसकी गुणवत्ता जांच, बिक्री और भुगतान तक की कमान खुद संभाल रहीं हैं। प्रदेश के 31 जिलों में महिलाएं प्रतिदिन करीब 12.5 लाख लीटर दूध का संग्रह कर रहीं हैं। इस बदलाव का सीधा असर महिलाओं की आमदनी पर भी पड़ा है और इनमें से 73 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आजीविका मिशन के जरिए ग्रामीण कारोबार को बिचौलियों से मुक्त कर महिलाओं को सीधे बाजार से जोड़ने का अभियान चलाया गया है। गांवों में तैयार हुआ यह नेटवर्क महिलाओं को दूध की सही कीमत दिलाने के साथ कारोबार का पूरा हिसाब भी उनके हाथ में दे रहा है। मोबाइल एप और डिजिटल मशीनों के इस्तेमाल से दूध की मात्रा, फैट की जांच, कीमत और भुगतान का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हो रहा है।

गांव में रहकर संभाल रहीं लाखों का कारोबार

ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन लंबे समय से परिवारों की आय का महत्वपूर्ण जरिया रहा है। पशुओं की देखभाल और दूध उत्पादन में महिलाओं की भूमिका सबसे अधिक होने के बावजूद दूध की बिक्री, कीमत तय करने और हिसाब-किताब में उनकी सीधी भागीदारी सीमित रहती थी। अब डेयरी के नए मॉडल के जरिए इस व्यवस्था को बदलना शुरू किया गया है। अब गांव की महिलाएं खुद दूध उत्पादक समूहों और कंपनियों से जुड़कर कारोबार संभाल रही हैं।

इस मॉडल की खास बात यह है कि महिलाओं को अपने गांव में रहकर ही नियमित बाजार मिल रहा है। संग्रह केंद्रों पर दूध पहुंचाने के बाद उसकी मात्रा और गुणवत्ता का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज हो जाता है। इससे महिला पशुपालकों को यह पता रहता है कि दूध का मात्रा कितनी है, फैट कितना है और उसके बदले कितना भुगतान मिलेगा।

बिचौलियों से मुक्ति, सीधे खाते में पहुंच रहा पैस

डिजिटल व्यवस्था ने दूध कारोबार में बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने के साथ पारदर्शिता बढ़ाई है। पहले ग्रामीण पशुपालकों को स्थानीय खरीदारों पर निर्भर रहना पड़ता था। कीमत और गुणवत्ता की जांच को लेकर भी उनके पास सीमित विकल्प होते थे। नई व्यवस्था में दूध की गुणवत्ता मशीन से जांची जा रही है और उसका रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज हो रहा है। इससे दूध की कीमत को लेकर होने वाली असमंजस की स्थिति कम हुई है। भुगतान की जानकारी भी डिजिटल रिकॉर्ड में रहने से महिलाओं को अपने कारोबार और आमदनी का स्पष्ट हिसाब मिल रहा है। इसका फायदा परिवार के आर्थिक प्रबंधन में भी दिखाई दे रहा है।

73 हजार से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि डिजिटल डेयरी नेटवर्क का असर महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में महिला नेतृत्व वाले इस दुग्ध मॉडल से जुड़कर 73 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यानी डेयरी कारोबार उनके लिए अतिरिक्त आमदनी का साधन भर नहीं रह गया है, बल्कि नियमित और मजबूत आजीविका के रूप में उभरा है। प्रदेश के 31 जिलों में फैला यह नेटवर्क ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को भी नया स्वरूप दे रहा है। दूध उत्पादन से मिलने वाली आमदनी सीधे महिलाओं के हाथ में आने से परिवार के रोजमर्रा के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दूसरी जरूरतों में उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ी है।

डिजिटल क्रांति से मुट्ठी में आया कारोबार

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि मोबाइल और डिजिटल तकनीक ने गांव की महिला पशुपालकों के लिए कारोबार को पहले से आसान बनाया है। दूध संग्रह से लेकर भुगतान तक की जानकारी ऑनलाइन होने से उन्हें अपने रोज के कारोबार का रिकॉर्ड रखने के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है। गांव स्तर पर तैयार यह डिजिटल नेटवर्क महिला सशक्तीकरण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है।

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